लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी टकराव बढ़ा। Amit Shah ने इसे 40 साल बाद आया दुर्भाग्यपूर्ण कदम बताया।
11 मार्च 2026,नई दिल्ली।
Amit Shah ने लोकसभा में Om Birla के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए नो-कॉन्फिडेंस मोशन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव करीब चार दशक बाद सामने आया है और यह संसदीय परंपराओं के लिहाज से “दुर्भाग्यपूर्ण” कदम है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल: शाह
गृह मंत्री ने सदन में कहा कि स्पीकर का पद पूरी तरह निष्पक्षता और भरोसे का प्रतीक होता है। उनके अनुसार, जब किसी स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाए जाते हैं तो इससे केवल सदन ही नहीं बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि भी प्रभावित होती है। शाह ने कहा कि संसद भारत के लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है।
Also Read: Why This Maharashtra Village Is Fining People ₹500 for ‘Maa-Behen’ Slurs
“सदन भरोसे से चलता है”
शाह ने अपने संबोधन में कहा कि संसद का कामकाज आपसी विश्वास पर चलता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ओम बिरला को स्पीकर चुना गया था, तब सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों ने मिलकर उन्हें आसन तक पहुंचाया था। ऐसे में स्पीकर के फैसलों से असहमति हो सकती है, लेकिन नियमों के अनुसार उनके निर्णय को अंतिम माना जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद “कोई मेला नहीं है”, बल्कि यहां कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत चलती है। इसलिए किसी भी सदस्य को नियमों के विपरीत बोलने या आरोप लगाने का अधिकार नहीं है।
विपक्ष का आरोप और सदन में टकराव
वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और विपक्षी नेताओं को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया। इसी को लेकर करीब 120 सांसदों ने उनके खिलाफ प्रस्ताव का नोटिस दिया था।
इस मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। विपक्ष जहां स्पीकर के आचरण पर सवाल उठा रहा है, वहीं एनडीए के नेता उनके फैसलों का बचाव कर रहे हैं और इसे राजनीतिक कदम बता रहे हैं।
