नए साल से पहले दिल्ली पुलिस ने दक्षिण-पूर्व दिल्ली में Operation Aghaat 3.0 चलाया, 966 हिरासत में, हथियार, नशा और अवैध शराब जब्त, जानें पूरी कार्रवाई और बरामदगी।
नई दिल्ली: नए साल के जश्न से ठीक पहले दिल्ली पुलिस ने अपराधियों के लिए ऐसा अभियान चलाया कि पूरा दक्षिण-पूर्व दिल्ली हिल उठा। दो दिन में 966 लोग हिरासत में, भारी मात्रा में हथियार, नशा और अवैध शराब जब्त—और ये सिर्फ शुरुआत थी। सवाल यह उठता है कि इतने बड़े स्तर पर इतनी सख्त कार्रवाई क्यों की गई? क्या पुलिस ने किसी बड़े अपराध नेटवर्क को पकड़ने की योजना बनाई थी? इस लेख में जानिए ऑपरेशन आघात 3.0 की पूरी कहानी, इसकी रणनीति, गिरफ्तारियों की विस्तारवार जानकारी और बरामदगी की चौंकाने वाली संख्या।
क्यों शुरू किया गया यह विशेष अभियान ?
ऑपरेशन आघात 3.0 दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पूर्व जिले द्वारा चलाया गया एक विशेष अभियान है, जिसे नए साल 2026 के जश्न से पहले 26 और 27 दिसंबर 2025 को अंजाम दिया गया। यह अभियान दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिल्ली के उन संवेदनशील इलाकों पर केंद्रित था, जहां अपराध की घटनाएं अधिक होती हैं। पुलिस के अनुसार, वर्ष के अंत में बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ बढ़ने से चोरी, नशा तस्करी, जुआ और हिंसा जैसी घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए पुलिस ने संगठित अपराध से जुड़े लोगों, बार-बार अपराध करने वालों, ड्रग्स बेचने वालों, अवैध शराब के कारोबारियों और वाहन चोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
पहले सफल रहे ऑपरेशन आघात 1.0 और 2.0 के बाद यह तीसरा चरण और भी बड़े स्तर पर चलाया गया। इस दौरान दक्षिण-पूर्व जिले की झुग्गी बस्तियों, रिहायशी इलाकों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में कार्रवाई की गई। अभियान में 600 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल थे, जिन्होंने पूरी रात गश्त की, वाहनों की जांच की और कई जगहों पर छापेमारी की। ऐसे अभियान दिल्ली पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य अपराध को पहले ही रोकना और नए साल के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अभियान का उद्देश्य और रणनीति
अभियान का प्राथमिक उद्देश्य नए साल के जश्न के दौरान अप्रिय घटनाओं को रोकना था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उत्सव के समय सड़क अपराध, जैसे छिनैती, चोरी और नशे से जुड़ी घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसलिए, संगठित अपराधियों को पहले ही निशाना बनाना आवश्यक था। रणनीति में शामिल थे:
• गहन गश्त और निगरानी: रात के समय विशेष टीमों द्वारा इलाकों की निगरानी की गई।
• वाहन जांच: संदिग्ध वाहनों की तलाशी ली गई, जिससे कई जब्तियां हुईं।
• छापेमारी: संदिग्ध ठिकानों पर अचानक छापे मारे गए, जहां से हथियार और नशीले पदार्थ बरामद हुए।
• निवारक कार्रवाई: भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111 और 112 के तहत कार्रवाई की गई, साथ ही बार-बार अपराध करने वालों के प्रत्यर्पण के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।
इस अभियान से पिछले एक महीने में सड़क अपराध से जुड़ी पीसीआर कॉलों में कमी आई है, जो इसकी प्रभावशीलता को दर्शाता है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व जिलों में कुल 2,800 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई, जिससे अपराधियों में दहशत फैल गई।
गिरफ्तारियां और हिरासत का विवरण
अभियान में कुल 966 लोग हिरासत में लिए गए, जिसमें विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, दक्षिण-पूर्व जिले में मुख्य रूप से:
• कानूनी गिरफ्तारियां: 331 लोग दिल्ली एक्साइज एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और पब्लिक गैंबलिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए। कुछ स्रोतों में यह संख्या 285 बताई गई है।
• निवारक हिरासत: 504 लोग विभिन्न निवारक प्रावधानों के अंतर्गत हिरासत में लिए गए।
• आदतन अपराधी (बैड कैरेक्टर्स): 116 सूचीबद्ध बैड कैरेक्टर्स को पकड़ा गया, जबकि कुल 155 आदतन अपराधियों पर कार्रवाई हुई।
• ऑटो चोर और संपत्ति अपराधी: 5 ऑटो चोर और 10 संपत्ति अपराधी गिरफ्तार।
• फरार अपराधी: 4 प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स को धर दबोचा गया।
• दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत: 1,306 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
कुल मिलाकर, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व जिलों में 660 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन दक्षिण-पूर्व में 966 हिरासत की संख्या निवारक और पूछताछ को शामिल करके बताई जा रही है।
हथियार और अवैध सामान की बरामदगी
अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध सामान जब्त किया गया, जो अपराध नेटवर्क की गहराई को उजागर करता है:
• हथियार (आर्म्स एक्ट के तहत): 21 देसी पिस्तौलें, 20 जिंदा कारतूस और 27 चाकू। कुछ रिपोर्टों में 24 पिस्तौलें, 44 चाकू और 30 कारतूस का उल्लेख है।
• अवैध शराब: 12,258 क्वार्टर (लगभग 22,000 से अधिक क्वार्टर की कुल मात्रा), जिससे 60 से अधिक बूटलेगर्स गिरफ्तार।
• नशीले पदार्थ: 6.01 किलोग्राम गांजा (कुछ स्रोतों में 10 किलोग्राम)।
• जुआ से संबंधित: 2.36 लाख रुपये नकद (कुछ में 2.30 लाख)।
• चोरी का सामान: 310 छीने या गुम हुए मोबाइल फोन, 231 दोपहिया वाहन और 1 चार पहिया वाहन।
• अन्य: 27 वाहन जब्त, जिनमें उल्लंघन वाले शामिल हैं।
ये जब्तियां अपराधियों के आर्थिक आधार को कमजोर करती हैं और पुलिस की जांच क्षमता को दर्शाती हैं।
पुलिस की रणनीति और प्रभाव
दिल्ली पुलिस ने इस अभियान में आधुनिक तकनीक और मानव संसाधनों का संयोजन किया। जिले भर में 600 से अधिक कर्मियों की टीम ने 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की, जो समन्वित प्रयास का उदाहरण है। अभियान से न केवल अपराध रोके गए, बल्कि चोरी हुए सामान की बरामदगी से पीड़ितों को राहत मिली। पिछले अभियानों की तुलना में, आघात 3.0 अधिक लक्षित था, जिसमें ड्रोन निगरानी और इंटेलिजेंस इनपुट का उपयोग किया गया (हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं)।
इससे शहर में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है, और उत्सव के दौरान सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिली। हालांकि, कुछ आलोचकों का कहना है कि ऐसे अभियान अस्थायी होते हैं, और लंबे समय के लिए अपराध जड़ों पर ध्यान देना चाहिए।
आधिकारिक बयान और प्रतिक्रियाएं
दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त (सुरक्षा) एसके जैन ने अभियान को ‘बहुत सफल’ बताया। उन्होंने कहा, “यह अभियान संगठित अपराध, ड्रग पेडलर्स, बूटलेगर्स, जुआरियों, आदतन अपराधियों और सड़क अपराधों के खिलाफ था। अपराधियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि दिल्ली में अपराध की कोई जगह नहीं।” अन्य अधिकारियों ने बताया कि अभियान नए साल के जश्न को अपराध मुक्त बनाने के लिए था।
सोशल मीडिया पर भी अभियान की चर्चा है, जहां कई यूजर्स ने पुलिस की सराहना की, जबकि कुछ ने गिरफ्तारियों की संख्या पर सवाल उठाए। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट्स से पता चलता है कि अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर कवरेज मिला।
ऑपरेशन आघात 3.0 दिल्ली पुलिस की सक्रियता का प्रमाण है, जो अपराध पर अंकुश लगाने में सफल रहा। इससे नए साल के उत्सव सुरक्षित होंगे, लेकिन लंबे समय में अपराध रोकथाम के लिए सामुदायिक भागीदारी और सुधार आवश्यक हैं। पुलिस ने ऐसे अभियान जारी रखने का संकल्प लिया है, ताकि दिल्ली एक सुरक्षित शहर बने। इस अभियान से अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की उम्मीद है।
