मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास पर मचा बवाल, विरासत से छेड़छाड़ के आरोपों के बीच प्रशासन की सफाई

मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास पर मचा बवाल, विरासत से छेड़छाड़ के आरोपों के बीच प्रशासन की सफाई

काशी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर विरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोगों और पुजारियों का कहना है कि आधुनिक निर्माण से घाट की आत्मा और विरासत खतरे में पड़ सकती है।

17 जनवरी 2026, नई दिल्ली

वाराणसी का मणिकर्णिका घाट, जिसे भारत के सबसे पवित्र और प्राचीन श्मशान घाटों में गिना जाता है, इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे पुनर्विकास कार्य ने जहां एक ओर आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद जगाई है, वहीं दूसरी ओर इसने स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों के बीच नाराज़गी भी पैदा कर दी है।

जिला प्रशासन मणिकर्णिका घाट को शिंदिया घाट से जोड़ने वाले एक भव्य कॉरिडोर के निर्माण पर काम कर रहा है। इस परियोजना के तहत संकरी गलियों को चौड़ा किया जा रहा है, पुराने ढांचों को हटाया जा रहा है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नए इंतजाम किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना की नींव जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी और इस पर करीब 17.56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

योजना के अनुसार, घाट क्षेत्र में रैंप, बैठने की बेहतर व्यवस्था, व्यूइंग एरिया, सीसीटीवी निगरानी और अंतिम संस्कार के लिए विशेष वुड प्लाज़ा जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे तीर्थयात्रियों और शोकाकुल परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और घाट तक पहुंच आसान होगी।

हालांकि, इस विकास कार्य ने विवाद भी खड़ा कर दिया है। हाल ही में आरोप लगे कि मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध शासिका देवी अहिल्याबाई होलकर की एक प्रतिमा वाले ढांचे को नवीनीकरण के दौरान गिरा दिया गया। अहिल्याबाई होलकर को 18वीं सदी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए याद किया जाता है, ऐसे में इस कार्रवाई ने लोगों की भावनाएं आहत कर दी हैं।

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इस मुद्दे पर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह संरचना लगभग सौ साल पुरानी थी और इसे बिना किसी सूचना या सलाह के तोड़ा गया। उनका आरोप है कि ‘विकास’ के नाम पर काशी की ऐतिहासिक पहचान और धार्मिक विरासत से समझौता किया जा रहा है।

विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि पुनर्विकास का उद्देश्य विरासत को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सुविधाओं को बेहतर बनाना है। वहीं दूसरी ओर, पुजारी और स्थानीय निवासी चाहते हैं कि विकास कार्यों में काशी की प्राचीन आत्मा और परंपराओं का सम्मान बना रहे।

मणिकर्णिका घाट का यह पुनर्विकास अब सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि परंपरा और आधुनिकता के टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले समय में जांच और प्रशासन के फैसले यह तय करेंगे कि काशी की यह ऐतिहासिक धरोहर किस रूप में आगे बढ़ेगी।

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