INDIA का फर्टिलिटी रेट 1.9 पर पहुंचा: क्या जनसंख्या घटने की ओर बढ़ रहा है देश?

INDIA का फर्टिलिटी रेट 1.9 पर पहुंचा: क्या जनसंख्या घटने की ओर बढ़ रहा है देश?

UNFPA के अनुसार INDIA का फर्टिलिटी रेट घटकर 1.9 हो गया है, जो रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से कम है। जानिए इसके पीछे के कारण, एलन मस्क की चिंता और भारत की जनसंख्या पर इसका संभावित प्रभाव

नई दिल्ली: INDIA को लंबे समय तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आबादी वाले देशों में गिना जाता रहा है। लेकिन हालिया आंकड़े कुछ ओर ही कह हैं । संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और कई जनसांख्यिकीय अध्ययनों के अनुसार भारत का कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) घटकर 1.9 पर पहुंच गया है।

यह आंकड़ा जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से कम है। इस विषय ने तब और अधिक चर्चा बटोरी जब दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में से एक, एलन मस्क, ने भी गिरती जन्मदर को लेकर चिंता जाहीर की । क्या अब भारत भी उन देशों की राह पर बढ़ रहा है जहां कम जन्मदर भविष्य की बड़ी चुनौती बन चुकी है।

क्या होता है फर्टिलिटी रेट?

फर्टिलिटी रेट या कुल प्रजनन दर से मतलब उस औसत संख्या से है जितने बच्चों को एक महिला अपने जीवनकाल में जन्म देती है। अगर किसी देश का फर्टिलिटी रेट 2.1 है, तो उसे रिप्लेसमेंट लेवल माना जाता है। इसका मतलब हैं कि एक पीढ़ी की जनसंख्या अगली पीढ़ी द्वारा प्रतिस्थापित हो जाती है जब यह दर 2.1 से नीचे चली जाती है, तो लंबे समय में जनसंख्या वृद्धि धीमी पड़ सकती है और कुछ परिस्थितियों में आबादी घट भी सकती है।

भारत में फर्टिलिटी रेट क्यों घट रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में फर्टिलिटी रेट में गिरावट कई सामाजिक और आर्थिक बदलावों का परिणाम है। सबसे बड़ा कारण महिलाओं की शिक्षा में वृद्धि है। आज पहले की तुलना में अधिक महिलाएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और करियर पर ध्यान दे रही हैं। इसके चलते विवाह और माँ बनने की औसत उम्र बढ़ रही है।

दूसरा महत्वपूर्ण कारण शहरीकरण है। शहरों में रहने वाले परिवार आमतौर पर छोटे परिवार को तबजो देते हैं। सीमित आवास, बढ़ती जीवन लागत और बच्चों की शिक्षा पर होने वाला अधिक खर्च भी परिवारों को कम बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करता है।

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इसके अलावा परिवार नियोजन के साधनों की उपलब्धता और जागरूकता में वृद्धि ने भी जन्मदर को प्रभावित किया है। आज दंपतियों के पास परिवार के आकार की योजना बनाने के अधिक विकल्प मौजूद हैं।

क्या यह चिंता का विषय है?

फर्टिलिटी रेट में गिरावट को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जा सकता। कई विशेषज्ञ इसे विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का संकेत मानते हैं। कम जन्मदर से परिवार बच्चों की बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर अधिक निवेश कर सकते हैं।

हालांकि, यह दर लंबे समय तक बहुत कम बनी रहती है, तो इसके कुछ गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों में कम जन्मदर के कारण वृद्ध आबादी तेजी से बढ़ रही है।

इससे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर दबाव और आर्थिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है। भारत के संदर्भ में फिलहाल ऐसी स्थिति फिलहाल नहीं है क्योंकि देश के पास अभी भी बड़ी युवा आबादी मौजूद है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की नीतियों में इस बदलाव को ध्यान में रखना होगा।

एलन मस्क ने क्यों जताई चिंता?

एलन मस्क पिछले कई वर्षों से दुनिया भर में गिरती जन्मदर को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। उनका मानना है कि देशों में जन्मदर लगातार घटती रही तो भविष्य में जनसंख्या संकट पैदा हो सकता है। भारत के फर्टिलिटी रेट के 2.1 से नीचे जाने की खबर पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद यह मुद्दा वैश्विक चर्चा का विषय बन गया।

हालांकि कई जनसंख्या विशेषज्ञ मस्क के विचारों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि हर देश की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए केवल जन्मदर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होगा।

क्या भारत की आबादी अब घटने लगेगी?

इसका जवाब फिलहाल “नहीं” है। भले ही फर्टिलिटी रेट रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ गया हो, लेकिन भारत की आबादी अभी भी बढ़ रही है। इसका प्रमुख कारण देश में बड़ी संख्या में युवा लोगों का होना है, जो आने वाले वर्षों में परिवार स्थापित करेंगे। जनसंख्या विज्ञान में इसे “Population Momentum” कहा जाता है।

इसका मतलब है कि कम जन्मदर के बावजूद आबादी कुछ समय तक बढ़ती रह सकती है क्योंकि प्रजनन आयु वर्ग की आबादी बहुत बड़ी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत की जनसंख्या निकट भविष्य में स्थिर होने की ओर बढ़ सकती है, लेकिन एक दम गिरावट की संभावना नहीं है।

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