तकनीकी शिक्षा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिल्ली में निकाला शांतिपूर्ण मार्च

तकनीकी शिक्षा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिल्ली में निकाला शांतिपूर्ण मार्च

नई दिल्ली: दिल्ली में GOFTE के नेतृत्व में विभिन्न सरकारी पॉलिटेक्निक और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लगभग 200 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण पैदल मार्च किया। मार्च का उद्देश्य DTTE को ज्ञापन सौंपते हुए तकनीकी शिक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के सेवा हितों और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान केंद्रित करना था।

मार्च में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 2021 में दिल्ली सरकार के अधीन संचालित सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (DSEU) में सम्मिलित किए जाने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों को उनकी सहमति के बिना तथाकथित “Deemed Deputation” पर भेज दिया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि यह व्यवस्था आज तक जारी है और इससे उनके सेवा हितों, कैडर अधिकारों एवं भविष्य की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

फोरम ने मांग की कि दिल्ली के सभी सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को पुनः Directorate of Training & Technical Education (DTTE) के अधीन लाया जाए तथा उन्हें DSEU से अलग किया जाए, ताकि तकनीकी शिक्षा की मूल संरचना एवं उद्देश्य को संरक्षित किया जा सके।

फोरम के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों एवं अधिकारियों की नियुक्तियां UPSC के माध्यम से हुई हैं तथा उनकी सेवा शर्तें एवं शैक्षणिक मानक AICTE Norms के अनुरूप निर्धारित हैं। जबकि DSEU मुख्य रूप से विश्वविद्यालय प्रणाली एवं UGC आधारित ढांचे के अंतर्गत कार्य कर रही है। उनका आरोप है कि डिप्लोमा तकनीकी शिक्षा के लिए आवश्यक AICTE अनुमोदन एवं मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे छात्रों एवं संस्थानों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले पांच वर्षों में कर्मचारियों को विभिन्न सेवा-संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि पेंशन, चिकित्सा सुविधाओं, LTC तथा अन्य सेवा लाभों से जुड़े मुद्दे अभी तक पूरी तरह स्पष्ट एवं संतोषजनक रूप से हल नहीं किए गए हैं। साथ ही, कर्मचारियों की सहमति के बिना उन्हें Deemed Deputation पर भेजे जाने के विषय में भी असंतोष व्यक्त किया गया।

फोरम ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के बुनियादी ढांचे की स्थिति चिंताजनक है। अनेक भवनों में वर्षा के दौरान पानी का रिसाव, जर्जर शौचालय, प्रयोगशालाओं एवं कार्यशालाओं में नई मशीनरी की कमी तथा रखरखाव पर अपर्याप्त व्यय जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है तथा विद्यार्थियों को इसका प्रत्यक्ष नुकसान उठाना पड़ रहा है।

फोरम के प्रतिनिधियों ने कहा कि तथाकथित Deemed Deputation व्यवस्था को लागू हुए लगभग पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में Gazetted एवं Non-Gazetted कर्मचारी आज भी अपने भविष्य, कैडर स्थिति एवं प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार इस विषय पर स्पष्ट निर्णय लेते हुए कर्मचारियों एवं संस्थानों के हित में शीघ्र कार्रवाई करे।

मार्च के समापन पर फोरम के प्रतिनिधिमंडल ने DTTE को अपना ज्ञापन सौंपते हुए दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि सरकारी पॉलिटेक्निक शिक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के सेवा अधिकारों तथा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय निर्णय शीघ्र लिया जाए।

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