एचआरडीएस इंडिया का बयान: हिंसा की निंदा, कानून-व्यवस्था पर भरोसा

एचआरडीएस इंडिया का बयान: हिंसा की निंदा, कानून-व्यवस्था पर भरोसा

हाल के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, पुलिसकर्मियों पर हमलों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर एचआरडीएस इंडिया ने गहरी चिंता जताई और कानून-व्यवस्था, लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता में अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में जेन-जी के नेतृत्व वाले हालिया प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं पर एचआरडीएस इंडिया ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने सुरक्षाकर्मियों के घायल होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने कानून-व्यवस्था भंग करते हुए पुलिस बल पर पथराव किया, सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त किया और हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा। इन घटनाओं में वरिष्ठ अधिकारियों और महिला पुलिसकर्मियों सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि सार्वजनिक और निजी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा।

एचआरडीएस इंडिया ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से होना चाहिए। हिंसा, सुरक्षाकर्मियों पर हमले और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं हैं।

एचआरडीएस इंडिया ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करती है। छात्र और युवा भी इस संवैधानिक अधिकार के समान रूप से अधिकारी हैं और संगठन उनके शांतिपूर्ण एवं वैधानिक विरोध के अधिकार का सम्मान करता है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि विरोध तब तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जब तक वह शांतिपूर्ण बना रहता है। लेकिन हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान, पथराव या पुलिस पर हमला किसी भी रूप में लोकतांत्रिक असहमति नहीं माना जा सकता। कानून का शासन और सार्वजनिक व्यवस्था प्रत्येक लोकतंत्र की मूल आवश्यकता हैं।

एचआरडीएस इंडिया ने चिंता व्यक्त की कि यदि किसी भी प्रकार के बाहरी या विदेशी समर्थित तत्व छात्रों की वास्तविक समस्याओं का उपयोग कर सामाजिक अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं, तो ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

संगठन ने संविधान की रक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने में शासन, दिल्ली पुलिस तथा अन्य संस्थाओं पर विश्वास जताया। साथ ही कहा कि हिंसा करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिए।

एचआरडीएस इंडिया ने संवाद, राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और शांतिपूर्ण समाधान को लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए सभी पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की।

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