दिल्ली के आनंदोत्सव ’26 में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया
नई दिल्ली: युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और उन्हें सामाजिक बदलाव का भागीदार बनाने के उद्देश्य से आयोजित आनंदोत्सव ’26 में नशामुक्त भारत का संदेश प्रमुखता से सामने आया। आर्य समाज वसंत विहार में आयोजित 40वें वार्षिक महोत्सव के दूसरे दिन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने विद्यार्थियों से नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और एनजीटी के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस गोयल ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए निरंतर प्रयास और जागरूकता आवश्यक हैं। जानकारी की कमी कई युवाओं को नशे की ओर धकेल सकती है, जबकि इसकी लत से बाहर निकलना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और समाज के सामने मौजूद समस्याओं के समाधान में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल रचनात्मक कार्यों में होना चाहिए, ताकि वे अपने साथ समाज के विकास में भी योगदान दे सकें।
आनंदोत्सव के पहले दिन 14 अक्टूबर को ‘नो नशा नेशन’ अभियान पर ध्यान केंद्रित किया गया था। योगी सूरी के नेतृत्व में चल रही इस पहल का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से परिचित कराना और नशामुक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना है।
दूसरे दिन पर्यावरण संरक्षण को भी प्रमुखता दी गई। ‘YaRI’ यानी यमुना एक्शन रिवर इनिशिएटिव के माध्यम से विद्यार्थियों को यमुना प्रदूषण और नदी संरक्षण में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक किया गया। ‘YaRI – Our Responsibility’ नुक्कड़ नाटक ने इस विषय को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में जस्टिस प्रीतम पाल ने मानवीय मूल्यों को जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। समारोह में दिल्ली के 79 स्कूलों के लगभग 2,500 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। महोत्सव का समापन 16 अक्टूबर को पद्मश्री डॉ. पुनम सूरी की उपस्थिति में होगा, जहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पुरस्कार वितरण के साथ आयोजन संपन्न होगा।
