AAP की अंदरूनी रणनीति आई सामने, सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके दावा किया कि उनकी ही पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में बोलने से रोका कहा “Silenced, not defeated”
नई दिल्ली: 3 अप्रैल 2026 को AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने X (पहले Twitter) पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसका टाइटल था — “Silenced, not defeated”। इसके साथ उन्होंने हिंदी में लिखा: “खामोश करवाया गया हूँ, हारा नहीं हूँ।”2 मिनट 18 सेकंड के इस वीडियो में राघव चड्ढा संसद के बाहर खड़े होकर कह रहे हैं कि AAP ने राज्यसभा सचिवालय को लिखकर कहा कि उन्हें पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए।
उन्होंने गिनाया कि उन्होंने हमेशा आम आदमी के मुद्दे उठाए — एयरपोर्ट पर महंगा खाना, ज़ोमैटो-ब्लिंकिट के डिलीवरी राइडर्स की परेशानी, टोल प्लाज़ा की लूट, बैंक चार्जेज़, टेलीकॉम रिचार्ज में डेटा रोलओवर न मिलना, और मिडिल क्लास पर बढ़ता टैक्स बोझ।वीडियो के अंत में उन्होंने समर्थकों से “हाथ थामने” की अपील की और कहा कि वो एक नदी की तरह वापस आएंगे — जो बाढ़ बन जाती है।
क्या दावा सच है?
राघव चड्ढा का यह दावा बिल्कुल सही निकला। सरकारी रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों से पुष्टि होती है कि AAP ने वाकई राज्यसभा सचिवालय को लिखित में कहा था कि चड्ढा को पार्टी के आवंटित समय से बोलने का अवसर न दिया जाए।
तारीख दर तारीख
2 अप्रैल 2026 को AAP ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र भेजा जिसमें दो बड़े बदलावों की जानकारी दी गई:
- पहला — राघव चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी का डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया।
- दूसरा — लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर और पंजाब से AAP सांसद अशोक मित्तल को नया डिप्टी लीडर बनाया गया — जबकि संजय सिंह लीडर के पद पर बने रहे।
इसी पत्र में साफ लिखा था कि चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए।
उसी दिन जब राघव चड्ढा ने जन विश्वास संशोधन विधेयक पर बोलने की अनुमति माँगी, तो राज्यसभा सचिवालय ने यह कहते हुए मना कर दिया — “पार्टी की ओर से कोई टाइम अलॉकेशन नहीं है।”
AAP ने क्या कहा इस पर?
पार्टी ने इस पूरे मामले को “सामान्य संगठनात्मक फैसला” और “लोकतांत्रिक प्रक्रिया” बताया। नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल ने पत्रकारों से कहा कि हमारी पार्टी में सबको बोलने का मौका मिलता है और राघव चड्ढा को भी भविष्य में राज्यसभा में बोलने का समय मिलेगा। पार्टी ने राघव चड्ढा पर कोई आरोप नहीं लगाया और उन्हें पार्टी से निष्कासित भी नहीं किया। वे अभी भी पंजाब से 2022 में AAP के टिकट पर चुने गए राज्यसभा सांसद हैं।
पार्टी के अंदर क्या चल रहा है?
राघव चड्ढा — एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और AAP का कभी चमकता चेहरा — वायरल संसदीय भाषणों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ वक्त से पार्टी के अंदर खींचतान की खबरें आ रही थीं।
वो कई बड़े AAP मामलों में चुप रहे — जिसमें अरविंद केजरीवाल को शराब नीति केस में कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी उनकी प्रतिक्रिया नहीं आई। पार्टी के अहम कार्यक्रमों से भी उनकी अनुपस्थिति नोटिस की गई।
यह AAP में कोई पहली बार नहीं हुआ। पार्टी पहले भी कुमार विश्वास और कपिल मिश्रा जैसे नेताओं को आंतरिक विवादों के बाद हाशिए पर धकेल चुकी है। चड्ढा का मामला भी उसी कड़ी में है — हालाँकि बोलने का समय रोकने का इतना सीधा लिखित फैसला असामान्य है।
क्या कह रहे हैं राघव चड्ढा ?
राघव चड्ढा ने इस पाबंदी को अपने मुद्दों की सज़ा की तरह पेश किया — जैसे आम आदमी की बात करने पर उन्हें चुप कराया जा रहा हो, लेकिन सच यह है कि यह फैसला पार्टी की आंतरिक फेरबदल का नतीजा है, उनके भाषणों के विषयों से नहीं जुड़ा। AAP ने कभी नहीं कहा कि उन्हें एयरपोर्ट फूड या टोल प्लाज़ा पर बोलने से रोका जा रहा है — पाबंदी पार्टी के समय के इस्तेमाल पर है, मुद्दों पर नहीं।
