भारत में पकड़े गए Pakistani fishermen, परिवारों की गुहार—‘हम गरीब हैं, बच्चों को तो छोड़ दीजिए’

भारत में पकड़े गए Pakistani fishermen, परिवारों की गुहार—‘हम गरीब हैं, बच्चों को तो छोड़ दीजिए’

समुद्री सीमा पार करने के आरोप में गिरफ्तार 11 Pakistani fishermen के परिजनों ने भारत-पाक सरकारों से मानवीय आधार पर रिहाई की अपील की है।

13 दिसंबर 225, नई दिल्ली

भारत की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इस सप्ताह भारतीय समुद्री सीमा में प्रवेश करने के आरोप में 11 Pakistani fishermen को हिरासत में लिया है। इनमें दो नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद अब इन मछुआरों के परिवारों ने भावुक अपील करते हुए भारत और पाकिस्तान की सरकारों से उन्हें जल्द रिहा कराने की मांग की है।

परिजनों का कहना है कि सभी मछुआरे बेहद गरीब हैं और मछली पकड़ना ही उनकी आजीविका का एकमात्र जरिया है। उनका आरोप है कि रोजी-रोटी की तलाश में वे समुद्र में निकलते हैं और कई बार अनजाने में सीमा पार हो जाती है।

‘हम बहुत गरीब लोग हैं’

गिरफ्तार मछुआरे गुलाम मुस्तफा के पिता अहमद ब्रोही ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनका परिवार कराची के इब्राहिम हैदरी मछुआरा गांव में रहता है। उन्होंने कहा,
“हम बहुत गरीब लोग हैं। मछली पकड़कर ही घर चलता है। पहले भी हमने बहुत दुख झेला है। सरकार से गुजारिश है कि कुछ करे।”

उन्होंने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि करीब चार साल पहले भी उनके इलाके के तीन मछुआरे इसी तरह पकड़े गए थे, जो आज तक भारत की जेलों में बंद हैं।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) ने इन मछुआरों को गुजरात के जखाऊ इलाके के पास पकड़ा। उनकी नाव भारतीय समुद्री सीमा में पाई गई थी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।

इस पर सिंध फिशरीज विभाग की प्रमुख फातिमा मजीद ने कहा कि संभव है मछुआरे गलती से सीमा पार कर गए हों। उन्होंने बताया कि अरब सागर में भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा स्पष्ट रूप से नजर नहीं आती, जिससे अक्सर मछुआरे अनजाने में दूसरी ओर चले जाते हैं।

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‘समुद्र में गरीबों की कोई सीमा नहीं’

फातिमा मजीद ने आगे कहा कि काजर क्रीक और सर क्रीक जैसे इलाके ऐसे हैं, जहां दोनों देशों के मछुआरे अक्सर पकड़े जाते हैं। ये क्षेत्र गुजरात के पास स्थित हैं।
उनका कहना था, “गरीब मछुआरों के लिए समुद्र में कोई सीमा नहीं होती। उनके लिए सबसे बड़ी सीमा अपने परिवार का पेट भरना होता है।”

नाबालिग बच्चों को रिहा करने की मांग

इस बार पकड़े गए मछुआरों में 12 साल का जहीर और 15 साल का हबीब भी शामिल हैं। फातिमा मजीद ने भारत से मानवीय आधार पर कम से कम नाबालिग बच्चों को रिहा करने की अपील की है।

पाकिस्तान फिशरफोक फोरम के अनुसार, इस ताजा घटना के बाद भारत की जेलों में बंद पाकिस्तानी मछुआरों की संख्या करीब 74 हो गई है। आमतौर पर दोनों देश समय-समय पर कैदियों की अदला-बदली करते रहे हैं, लेकिन बीते एक साल से भारत-पाक तनाव के चलते यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।

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