बंदरों पर किए गए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया कि 40 हर्ट्ज की कम फ्रीक्वेंसी वाली आवाज दिमाग से हानिकारक प्रोटीन हटाने में मदद कर सकती है।
16 जनवरी 2026, नई दिल्ली
अल्जाइमर जैसी गंभीर और अब तक लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों को एक नई उम्मीद मिली है। हालिया शोध में यह संकेत मिले हैं कि खास तरह की साउंड थेरेपी, विशेष रूप से 40 हर्ट्ज की कम फ्रीक्वेंसी वाली आवाज, दिमाग की सफाई प्रक्रिया को सक्रिय कर सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ दिमाग में बीटा-एमाइलॉयड नाम का एक जहरीला प्रोटीन जमा होने लगता है। यही प्रोटीन धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं के बीच संपर्क को कमजोर करता है, जिससे याददाश्त पर असर पड़ता है और अल्जाइमर की समस्या शुरू होती है।
वैज्ञानिक जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जब बंदरों को 40 हर्ट्ज की ध्वनि सुनाई गई, तो उनके मस्तिष्क से निकलने वाले तरल में इस हानिकारक प्रोटीन की मात्रा बढ़ी हुई पाई गई। इसका मतलब यह हुआ कि दिमाग इस गंदगी को बाहर निकालने में ज्यादा सक्रिय हो गया था।
कैसे काम करती है 40 हर्ट्ज साउंड थेरेपी?
दरअसल, हमारा दिमाग एक खास इलेक्ट्रिकल रिदम पर काम करता है, जो उसकी सफाई प्रणाली को कंट्रोल करता है। अल्जाइमर के मरीजों में यह रिदम बिगड़ जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 40 हर्ट्ज की आवाज दिमाग की इसी लय को दोबारा संतुलित करने में मदद करती है, जिससे सफाई का सिस्टम सही ढंग से काम करने लगता है।
शोध में क्या सामने आया?
चीन के कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ जूलॉजी के वैज्ञानिकों ने 9 उम्रदराज बंदरों पर यह प्रयोग किया। एक हफ्ते तक रोजाना एक घंटे उन्हें खास ध्वनि सुनाई गई। नतीजों में पाया गया कि दिमाग से निकलने वाले तरल में हानिकारक प्रोटीन की मात्रा करीब 200 प्रतिशत तक बढ़ गई। हैरानी की बात यह रही कि साउंड थेरेपी बंद करने के कई हफ्तों बाद भी यह प्रक्रिया जारी रही।
क्या इंसानों के लिए भी कारगर होगी?
हालांकि ये नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं, लेकिन विशेषज्ञ अभी इसे इंसानों के लिए पक्का इलाज मानने से बच रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि बंदरों पर मिले नतीजों को इंसानों पर लागू करने से पहले बड़े स्तर पर और लंबे समय तक अध्ययन की जरूरत है।
घर पर 40 हर्ट्ज सुनना कितना सही?
आजकल इंटरनेट पर 40 हर्ट्ज साउंड आसानी से उपलब्ध है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कम आवाज में इसे सुनने से नुकसान तो नहीं है, लेकिन इसके फायदे अभी वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुए हैं। लैब में इस्तेमाल की गई साउंड थेरेपी बेहद नियंत्रित माहौल में दी जाती है।
दुनियाभर में करीब 5.5 करोड़ लोग अल्जाइमर से प्रभावित हैं। ऐसे में साउंड थेरेपी भविष्य में एक सुरक्षित, सस्ता और बिना दवाइयों वाला विकल्प बन सकती है, लेकिन फिलहाल इसे उम्मीद की एक किरण ही माना जा रहा है।
Suditi Raje has a background in investigative journalism, with a career spanning over 6 years. As part of the Jankiawaz team, she are committed to exposing the truth and bringing to light the stories that matter most.
