महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़! पति अजीत पवार के आकस्मिक निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने संभाली राज्य की कमान। जानें उनके शपथ ग्रहण, राजनीतिक सफर और परिवार की बदलती भूमिका के बारे में।
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में 31 जनवरी, 2026 की तारीख बहुत महत्वपूर्ण हो गई, लेकिन यह दिन बहुत दुखी भी था। वरिष्ठ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजीत पवार के निधन के तीन दिन बाद, उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह समारोह राजभवन में हुआ और बहुत साधारण तरीके से आयोजित किया गया था, जहां राज्यपाल आचार्य ने उन्हें शपथ दिलाई। देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह क्षण न केवल एक बड़े राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है, बल्कि एक पत्नी द्वारा अपने पति की विरासत को आगे ले जाने के संकल्प का भी प्रमाण है।
राजनीतिक उत्तराधिकार और सर्वसम्मति
अजीत पवार के असामयिक निधन ने पार्टी और सरकार में जो खालीपन पैदा किया था, उसे भरने के लिए NCP के विधायकों ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को अपना नेता चुना। पार्टी के दिग्गज नेता छगन भुजबल ने पुष्टि की कि पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर पूर्ण सहमति थी। सुनेत्रा पवार अब उन अधिकांश विभागों का कार्यभार संभालेंगी जो पहले अजीत पवार के पास थे, हालांकि वित्त और योजना विभाग फिलहाल इस सूची से बाहर रखे गए हैं।
सार्वजनिक सेवा और पारिवारिक विरासत का संगम
सुनेत्रा पवार का जन्म 18 अक्टूबर 1963 को उस्मानाबाद (धाराशिव) के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ था। उनके पिता पद्मसिंह पाटिल खुद एक वरिष्ठ नेता रहे हैं, जिससे राजनीति की समझ उन्हें विरासत में मिली। 1985 में अजीत पवार से विवाह के बाद, वह पवार परिवार की ‘वहिनी’ के रूप में पूरे महाराष्ट्र में लोकप्रिय हुईं।
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भले ही वह आज एक बड़े संवैधानिक पद पर पहुंची हैं, लेकिन उनका मुख्य योगदान हमेशा सामाजिक क्षेत्र में रहा है।
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महिला सशक्तिकरण एक ऐसी पहल है जो ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है। यह उन्हें अपने जीवन को बेहतर बनाने और अपने परिवार की देखभाल करने के लिए आवश्यक कौशल और संसाधन प्रदान करती है। ग्रामीण महिलाएं अक्सर समाज में पीछे रह जाती हैं और उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जागरूक नहीं किया जाता है। महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और समाज में उनकी भूमिका को मजबूत करना है।
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संवैधानिक चुनौती और भविष्य की राह
चूंकि सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और महाराष्ट्र विधानमंडल (विधानसभा या विधान परिषद) की सदस्य नहीं हैं, इसलिए उनके सामने छह महीने के भीतर राज्य के किसी सदन का सदस्य बनने की संवैधानिक अनिवार्यता होगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं, जो अजीत पवार के निधन के बाद खाली हुई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के लिए उनका अनुभव और सौम्य छवि एक बड़ी ताकत साबित हो सकती है।
पारिवारिक कलह और बदलती दूरियां
इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के दौरान, पवार परिवार के भीतर के मतभेद फिर से सामने आए। अनुभवी नेता शरद पवार ने बताया कि इस फैसले पर उनसे कोई चर्चा नहीं की गई और उन्हें इसकी खबर अखबारों और टीवी से मिली। यह बात दर्शाती है कि राजनीतिक विरासत के इस नाजुक मोड़ पर भी परिवार के दो गुटों के बीच की खाई कम नहीं हुई है।
सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना केवल एक पद की प्राप्ति नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत शोक को जनसेवा की जिम्मेदारी में बदलने का साहस है। वह एक ऐसे समय में राज्य का नेतृत्व करने उतरी हैं जब भावनाएं और चुनौतियां दोनों चरम पर हैं। अब सारा महाराष्ट्र यह देख रहा है कि वह अजीत पवार की विरासत को कैसे सहेजती हैं और राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में विकास के नए मानक कैसे स्थापित करती हैं।
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