आज 10 मार्च 2026 को 56 साल के हो रहे ओमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। जानिए उनकी जिंदगी, सियासी सफर और कश्मीर के लिए उनके संघर्ष की कहानी।
नई दिल्ली: 10 मार्च 1970 को इंग्लैंड के रॉचफोर्ड में जन्मे ओमर अब्दुल्ला आज अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं। लेकिन यह दिन सिर्फ एक नेता का जन्मदिन नहीं है — यह उस शख्स का दिन है जो एक साथ कश्मीरी, भारतीय और वैश्विक नागरिक की पहचान लेकर चलता है। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के उपाध्यक्ष और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला आज देश की सबसे जटिल और संवेदनशील राजनीति के केंद्र में हैं।
परिवार, विरासत और सत्ता
ओमर अब्दुल्ला की राजनीतिक जड़ें बेहद गहरी हैं। उनके नाना शेख मुहम्मद अब्दुल्ला — जिन्हें “शेरे-कश्मीर” कहा जाता था — ने 1932 में नेशनल कॉन्फ्रेंस की नींव रखी और भारत में विलय के बाद जम्मू-कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री बने। बाद में वे मुख्यमंत्री भी रहे। उनके पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला तीन बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ चुके हैं।
सबसे युवा CM से लेकर ऐतिहासिक वापसी तक
ओमर ने 1990 के दशक के अंत में राजनीति में कदम रखा। 1998 में मात्र 28 साल की उम्र में वे सांसद बने — 12वीं लोकसभा के सबसे युवा सदस्य। 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी की NDA सरकार में उन्होंने विदेश राज्य मंत्री का पद संभाला, जो नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक असाधारण बात थी।
जनवरी 2009 में सिर्फ 38 साल की उम्र में वे जम्मू-कश्मीर के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। NC-कांग्रेस गठबंधन की यह सरकार 2015 तक चली, जिसमें उन्होंने पर्यटन, युवा रोजगार और विकास पर जोर दिया।
2019 में धारा 370 हटने के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। इस दौरान ओमर को करीब आठ महीने हिरासत में रखा गया। लेकिन वे टूटे नहीं। सक्रिय राजनीति में वापस आए, 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामुला सीट से हार गए, लेकिन उसी साल जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में JKNC को जीत दिलाई।
16 अक्टूबर 2024 को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (SKICC) में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। JKNC ने 42 सीटें जीतीं, चार निर्दलीय विधायकों ने भी समर्थन दिया। कांग्रेस को छह और CPI(M) को एक सीट मिली। इस तरह ओमर अब्दुल्ला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।
ओमर की माँ मॉली एक अंग्रेज नर्स हैं, इसलिए उनकी परवरिश में कश्मीरी और ब्रिटिश दोनों संस्कृतियों का मेल रहा। उन्होंने श्रीनगर के बर्न हॉल स्कूल और हिमाचल प्रदेश के लॉरेंस स्कूल सनावर में पढ़ाई की। यही मिली-जुली पहचान उन्हें कश्मीर की स्थानीय भावनाओं और राष्ट्रीय राजनीति के बीच एक सेतु बनाती है।
मौजूदा कार्यकाल
अपने दूसरे कार्यकाल में ओमर अब्दुल्ला का सबसे बड़ा एजेंडा है — जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना। वे बार-बार केंद्र सरकार से अपील कर चुके हैं कि राज्यत्व की बहाली से ही निर्वाचित सरकार अपने वादे पूरे कर पाएगी। इसके साथ ही उन्होंने 2026-27 का बजट पेश किया, जिसमें दिहाड़ी मजदूरों, उद्योग जगत और समावेशी विकास पर खास ध्यान दिया गया है।
सुरक्षा मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार हैं, लेकिन ओमर ने पर्यटन को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर बनाने और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर सक्रिय काम किया है।
सोशल मीडिया से सड़क तक
शपथ लेते ही ओमर ने DGP को निर्देश दिया कि उनके काफिले के लिए ग्रीन कॉरिडोर न बनाया जाए और सायरन का इस्तेमाल कम से कम हो — ताकि आम जनता को परेशानी न हो। यह एक छोटी सी बात लगती है, लेकिन यह उनके स्वभाव को दर्शाती है — सीधे, स्पष्ट और जमीन से जुड़े नेता।
ट्विटर/X पर सक्रिय ओमर अपने आलोचकों को भी सीधे जवाब देते हैं। वे केंद्र की नीतियों की जहाँ आलोचना करते हैं, वहीं सकारात्मक योगदान के लिए तारीफ भी करते हैं
ओमर अब्दुल्ला सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत के संवाहक हैं जिसने दशकों तक कश्मीर को भारत के साथ जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई। तीन पीढ़ियों की सियासी यात्रा का बोझ उठाते हुए वे आज एक नए जम्मू-कश्मीर की नींव रखने में जुटे हैं — जहाँ शांति हो, विकास हो और लोगों की आवाज़ को असली सम्मान मिले।
