भाजपा स्थापना दिवस: 6 अप्रैल 1980 को बनी भाजपा आज 46 साल बाद वैश्विक पहचान बना चुकी है। जानिए इसकी विचारधारा, संस्थापक और विकास की कहानी
नई दिल्ली: बीजेपी 06 अप्रैल को अपना 46वां स्थापना दिवस मना रही है। नई दिल्ली का फीरोजशाह कोटला मैदान में उस दिन जो हुआ, उसने भारतीय राजनीति की दिशा हमेशा के लिए बदल दी। जनता पार्टी के बिखरने के बाद पूर्व भारतीय जनसंघ के नेताओं ने एक नई पार्टी बनाने का फैसला किया — भारतीय जनता पार्टी। उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह पार्टी एक दिन दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनेगी, लेकिन जो लोग उस मैदान में जमा हुए थे, उनके इरादे साफ थे — एक सोच, एक संगठन, और एक नया सफर।
भाजपा की जड़ें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 1951 में स्थापित भारतीय जनसंघ में हैं, लेकिन आधुनिक भाजपा को असली आकार देने का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी और उनके साथी नेताओं को जाता है। छोटी-सी शुरुआत से लेकर आज के विशाल संगठन तक का यह सफर उन संस्थापकों के अटूट समर्पण और राष्ट्रवाद की मिसाल है
विचारधारा की मजबूत नींव
भाजपा की वैचारिक नींव बहुत गहरी है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रवाद की मजबूत आवाज उठाई और भारतीय जनसंघ की स्थापना की। उनके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद की अवधारणा दी, जो आज भी भाजपा की सोच और नीतियों का आधार है।
1977 में जनसंघ जनता पार्टी में विलय हो गया था, लेकिन 1980 में दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर पुराने जनसंघी नेता अलग हो गए और भाजपा का गठन किया। उन्होंने पुरानी विचारधारा को नए समय के हिसाब से नया रूप दिया।
प्रमुख संस्थापक नेता
भाजपा बनाने में जिन नेताओं ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई, वे इस प्रकार हैं:
अटल बिहारी वाजपेयी
भाजपा के प्रथम अध्यक्ष (1980-1986)। बेहद लोकप्रिय वक्ता और कवि होने के साथ-साथ वे कुशल राजनयिक भी थे। उनकी नेतृत्व क्षमता ने पार्टी को मुख्यधारा की राजनीति में स्थापित किया। बाद में वे देश के प्रधानमंत्री बने और भारत रत्न से सम्मानित हुए।
लाल कृष्ण आडवाणी
स्थापना के सह-संस्थापक और पार्टी के मजबूत संगठनकर्ता। वे कई बार अध्यक्ष रहे। राम जन्मभूमि आंदोलन के जरिए उन्होंने भाजपा को आम जनता से जोड़ा। उनका अनुशासन और दूरदृष्टि पार्टी को कैडर-आधारित मजबूत संगठन बनाने में मददगार साबित हुई।
मुरली मनोहर जोशी
स्थापना के समय के प्रमुख बौद्धिक नेता, जो बाद में पार्टी अध्यक्ष भी बने।
अन्य महत्वपूर्ण संस्थापक
कुशाभाऊ ठाकरे, भैरों सिंह शेखावत, एस.एस. भंडारी, जगन्नाथ राव जोशी, विजयराजे सिंधिया, नानाजी देशमुख और के.आर. मलकाणी जैसे नेताओं ने भी स्थापना में अहम योगदान दिया।
6 अप्रैल 1980 को कोटला मैदान में अटल बिहारी वाजपेयी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया और पार्टी की औपचारिक शुरुआत हुई।
पंच निष्ठाएं: भाजपा की आत्मा
स्थापना के दिन भाजपा ने पाँच मूल प्रतिबद्धताएं अपनाईं, जिन्हें पंच निष्ठाएं कहा गया। ये सिर्फ कागज पर लिखे शब्द नहीं थे — ये उस सोच की बुनियाद थी जिस पर पार्टी खड़ी होनी थी।
राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र में आस्था, गांधीवादी समाजवाद, सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान, और मूल्य-आधारित राजनीति — ये पाँचों निष्ठाएं आज भी पार्टी के हर फैसले की बुनियाद मानी जाती हैं।
- राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता
- लोकतंत्र
- गांधीवादी समाजवाद (शोषण-मुक्त समता-युक्त समाज)
- सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता (सर्वधर्म समभाव)
- मूल्य-आधारित राजनीति
ये पांच सिद्धांत भाजपा को सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचार-आंदोलन बनाते हैं।
2 सीट से दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी तक
शुरुआत आसान नहीं थी। 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सिर्फ 2 सीटें मिलीं। उस वक्त कई लोगों ने इसे एक डूबती हुई नाव माना, लेकिन कार्यकर्ताओं ने हार नहीं मानी। संगठन फैलता रहा, जनसमर्थन बढ़ता रहा।
राम जन्मभूमि आंदोलन ने पार्टी को नई ऊर्जा दी। 1996 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। 1998 से 2004 के बीच अटल जी के नेतृत्व में सरकार चली और 2014 के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने वो मुकाम हासिल किया जो आज बूथ स्तर तक फैली दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में जाना जाता है।
भाजपा के 46वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर बधाइयों की भरमार देखने को मिली। Narendra Modi ने ट्वीट कर पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं और संगठन की विचारधारा व राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को रेखांकित किया।
भाजपा के संस्थापक सिर्फ राजनीतिक नेता नहीं थे, वे राष्ट्र-भक्ति और सिद्धांतों के जीवंत प्रतीक थे। अटल-आडवाणी की जोड़ी ने जो मजबूत नींव रखी, उसे आज हजारों-लाखों कार्यकर्ता “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
