US- Israel-Iran War: 6 अप्रैल 2026 को तेहरान में अमेरिकी-इजरायली हमले में IRGC इंटेलिजेंस प्रमुख मजीद खादेमी मारे गए। जानिए कौन थे खादेमी और इस हमले का क्षेत्रीय असर
नई दिल्ली: 6 अप्रैल 2026 की सुबह जब तेहरान के लोग अभी नींद में थे, उसी वक्त एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे मध्य-पूर्व को हिला दिया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के इंटेलिजेंस संगठन के प्रमुख मेजर जनरल मजीद खादेमी अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए — यह जानकारी IRGC ने ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के जरिए सोमवार को दी। यह हमला महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं है — यह ईरान की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ पर सीधा प्रहार है।
कौन थे मजीद खादेमी?
ब्रिगेडियर जनरल मजीद खादेमी को रिवोल्यूशनरी गार्ड के सबसे रहस्यमय और प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक माना जाता था। उनके पास “राष्ट्रीय सुरक्षा” और “रणनीतिक रक्षा अध्ययन” में दो डॉक्टरेट की उपाधियाँ थीं। वे एक ऐसे अफसर थे जो मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर परदे के पीछे से काम करना पसंद करते थे।
19 जून 2025 को खादेमी को IRGC के खुफिया विभाग का नया प्रमुख नियुक्त किया गया था। वे मोहम्मद काज़ेमी की जगह आए थे, जो “बारह दिनों के युद्ध” के दौरान 15 जून 2025 को इजरायली हवाई हमलों में मारे गए थे।
IRGC के अनुसार खादेमी ने करीब पाँच दशकों की सेवा में ईरान के खुफिया और सुरक्षा अभियानों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। संगठन ने उन्हें देश की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अनुभवी और प्रभावशाली शख्सियतों में से एक बताया।
कैसे हुआ हमला?
IRGC ने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा — “मेजर जनरल मजीद खादेमी, IRGC के इंटेलिजेंस संगठन के शक्तिशाली और शिक्षित प्रमुख, आज सुबह अमेरिकी-ज़ायोनिस्ट दुश्मन के इस आपराधिक आतंकवादी हमले में शहीद हो गए।”
रिपोर्टों के मुताबिक यह हमला सीधे खादेमी के घर को निशाना बनाकर किया गया। इजरायल ने इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी तुरंत ले ली।
इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने सोमवार सुबह पत्रकारों को बताया कि खादेमी संगठन के तीन सबसे वरिष्ठ अफसरों में से एक थे और इजरायली नागरिकों पर हमलों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार थे। उन्होंने यह भी कहा कि खादेमी की मौत IRGC की खुफिया और अभियान क्षमताओं के लिए एक गंभीर झटका है।
ईरान और इजरायल — दोनों की प्रतिक्रिया
इजरायली रक्षा मंत्री काट्ज़ का बयान सीधा और कड़ा था: “रिवोल्यूशनरी गार्ड नागरिकों पर गोलियाँ चलाते हैं और हम उनके नेताओं को खत्म करते हैं।”
ईरान ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे “अमेरिकी-ज़ायोनिस्ट षड्यंत्र” करार दिया। IRGC ने खादेमी को “शहीद” बताते हुए कहा कि उनका काम ईरान की खुफिया दुनिया को आगे भी प्रभावित करता रहेगा।
सिर्फ खादेमी नहीं — एक और बड़ा नुकसान
IDF ने यह भी दावा किया कि रात भर के हमलों में एक और वरिष्ठ IRGC अधिकारी यज़दान मीर — जिन्हें सरदार बाघेरी के नाम से भी जाना जाता था और जो IRGC कुद्स फोर्स की गोपनीय यूनिट 840 के प्रमुख थे — भी मारे गए।
संघर्ष का व्यापक संदर्भ
मजीद खादेमी की मौत “डिकैपिटेशन स्ट्राइक्स” की उसी श्रृंखला का हिस्सा है जो जून 2025 से ईरान-इजरायल युद्ध की पहचान बन चुकी है। दर्जनों शीर्ष अधिकारी — जिनमें मंत्री और वरिष्ठ कमांडर शामिल हैं — इस्फहान, तेहरान और यहाँ तक कि बेरूत में भी निशाना बनाए जा चुके हैं।
यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं — पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक 45 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव सामने आया था, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाना था।
मजीद खादेमी की मौत ईरान की खुफिया व्यवस्था के लिए एक गहरा आघात है। उनकी मौत यह भी दर्शाती है कि ईरान के शीर्ष अधिकारी इस जारी संघर्ष में कितने असुरक्षित हैं। अब सबकी नजरें तेहरान की उस प्रतिक्रिया पर टिकी हैं जो वह इस हमले के जवाब में देगा — और इस बात पर भी कि क्या कोई शांति की राह अभी भी बाकी है।
