उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश की सियासत में सोमवार की रात एक बड़ा मोड़ आया। जब नोएडा के इंडस्ट्रियल इलाकों में मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा, तो मुख्यमंत्री ने देर रात ही एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को मंजूरी देते हुए न्यूनतम मजदूरी में तत्काल बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया।
यह बढ़ोतरी पूर्व प्रभाव से यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी। सरकार का यह कदम श्रम अशांति को थामने की कोशिश तो है ही, साथ ही यह संदेश भी देता है कि मजदूरों की आवाज़ अनसुनी नहीं रहेगी।
आखिर क्यों भड़के नोएडा के मजदूर?
13 अप्रैल को नोएडा के फेज-2 और सेक्टर 60 के इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में हजारों गारमेंट और फैक्ट्री कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। उनकी माँग साफ थी — बढ़ती महंगाई के बीच तनख्वाह इतनी कम है कि घर चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक हो गया। आगजनी, पथराव और वाहनों को नुकसान पहुँचाने की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। मजदूरों की एक बड़ी शिकायत यह भी थी कि पड़ोसी राज्य हरियाणा में अकुशल मजदूरों को करीब ₹15,220 प्रतिमाह मिल रहे हैं, जबकि यूपी में यही दर बेहद कम थी।
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इस वीडियो में, गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने पुष्टि की है कि एक उच्च-स्तरीय समिति ने कामगारों की मांगों को स्वीकार कर लिया है। इन मांगों में न्यूनतम वेतन में वृद्धि, डबल ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक छुट्टी, 10 तारीख तक समय पर वेतन भुगतान, पे-स्लिप जारी करना आदि शामिल हैं।
डीएम ने कामगारों से शांति बनाए रखने और आंदोलन समाप्त करने की अपील की है।
कितनी बढ़ी मजदूरी? जानिए नई दरें
सरकार ने 74 अनुसूचित रोज़गार क्षेत्रों — जिनमें फैक्ट्रियाँ, दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और संबंधित क्षेत्र शामिल हैं — के लिए क्षेत्रवार नई दरें तय की हैं।
पुरानी दरें (मासिक):
अकुशल: ₹11,313–11,314
अर्धकुशल: ₹12,445
कुशल: ₹13,940
नई संशोधित दरें:
- गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और गाज़ियाबाद:
अकुशल: ₹13,690 (करीब 21% की बढ़ोतरी)
अर्धकुशल: ₹15,059
कुशल: ₹16,868
- अन्य नगर निगम क्षेत्र:
अकुशल: ₹13,006
अर्धकुशल: ₹14,306
कुशल: ₹16,025
- उत्तर प्रदेश के शेष जिले:
अकुशल: ₹12,356
अर्धकुशल: ₹13,591
कुशल: ₹15,224
गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने पुष्टि की है कि उच्चस्तरीय समिति की सिफारिश के बाद यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू की गई है ताकि इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में माहौल सामान्य हो सके।
मजदूरों को राहत, लेकिन माँग अभी भी अधूरी
नोएडा-गाज़ियाबाद के मजदूरों के लिए यह बढ़ोतरी एक बड़ी राहत ज़रूर है — करीब 20 से 21 फीसदी का इज़ाफा एक झटके में हुआ है, लेकिन यह भी सच है कि प्रदर्शनकारी मजदूरों ने ₹20,000 प्रतिमाह, साप्ताहिक अवकाश और बेहतर काम के हालात की माँग की थी। सरकार का यह कदम फिलहाल एक अंतरिम राहत है — पूरी माँग अभी पूरी नहीं हुई।
श्रम विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक अस्थायी उपाय है और आने वाले महीनों में न्यूनतम मजदूरी की व्यापक समीक्षा की संभावना है।
नियोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
नोएडा और गाज़ियाबाद के कारखानों और प्रतिष्ठानों पर इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। सरकार ने सभी नियोक्ताओं को निर्देश दिया है कि वे:
तुरंत नई दरें लागू करें
- अप्रैल से बकाया राशि (यदि कोई हो) जल्द से जल्द चुकाएं
- न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत पालन न करने पर कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें
उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों और उनके प्रतिनिधियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि श्रमिक संगठनों के साथ बातचीत का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली और हरियाणा समेत कई पड़ोसी राज्यों की नज़र है।
