जहां एक ओर टाइगर रिजर्व में बाघों की दहाड़ गूंजती है, वहीं दूसरी ओर बांसुरी की मधुर धुनें इसकी खास पहचान हैं।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश का पीलीभीत ज़िला, जो अपनी एक अलग पहचान के लिए पूरे देश में मशहूर है, जहां एक ओर घने जंगलों में बाघों की दहाड़ है, तो दूसरी ओर गलियों में गूंजती बांसुरी की मीठी धुनें हैं, जो यहां को खास बनाती हैं। इसी वजह से पीलीभीत को बांसुरी नगरी कहा जाता है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का रोमांच
पीलीभीत टाइगर रिजर्व तराई के खूबसूरत घने जंगलों के बीच स्थित है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व बढ़ती बाघों की संख्या के लिए अंतरराष्ट्रीय TX2 पुरस्कार भी हासिल कर चुका है। यहां के घने जंगल, हरे-भरे घास के मैदान और शारदा नहर के किनारे वन्यजीवों की मौजूदगी पर्यटकों को रोमांच से भर देती है। यहां के टाइगर रिजर्व में 70 से 80 के करीब बाघ, तेंदुआ, भालू और कई प्रकार के पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। जंगल सफारी के दौरान बाघों का दिखना आम बात है।
चूका बीच: प्रकृति के बीच सुकून का एहसास

पीलीभीत का सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल चूका बीच है, जो शारदा नदी और शारदा सागर बांध के पास है। यहां बांस और थारू शैली की झोपड़ियां बनी हुई हैं, जिनमें बाहर से आए पर्यटक रुकते हैं और प्रकृति का आनंद लेते हैं। सुबह की ठंडी हवा और जंगल की शांति यहां अलग ही सुकून देती है।
बांसुरी उद्योग से देशभर में पहचान

पीलीभीत सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती ही नहीं, बल्कि बांसुरी कारोबार के लिए भी देश में काफी जाना जाता है। यह शहर भारत की लगभग 95 प्रतिशत बांसुरियां तैयार करता है। यहां बांसुरी का उद्योग करीब 150 साल पुराना है और इसे उत्तर प्रदेश सरकार ने ODOP (One District One Product) योजना में भी शामिल किया है।
खास बांस से तैयार होती है बांसुरी
यहां के बांसुरी बनाने वाले कारीगर असम की बराक घाटी से एक खास बिना गांठ वाली बांस मंगाते हैं, जिससे बांसुरी तैयार की जाती है। इसके लिए कारीगर के पास अनुभव होना आवश्यक है।
16.5 फीट लंबी बांसुरी बनी आकर्षण का केंद्र
यहां पर 16.5 फीट की भी एक बांसुरी है, जिसको स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किया गया। सैकड़ों साल से बांसुरी बनाने की कला आज भी शहर की पहचान बनी हुई है।
