वॉशिंगटन डी.सी.: अमेरिकी सीनेटर टिम शीही (आर-एमटी) ने डॉ. के. ए. पॉल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 में बदलाव की मांग की है। शीही और पॉल ने ऐसे प्रावधानों को हटाने की अपील की है, जिनसे चर्च, स्कूल, अस्पताल, अनाथालय और अन्य धर्मार्थ संस्थानों की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण का अधिकार मिल सकता है।
डॉ. के. ए. पॉल ने प्रस्तावित नामित प्राधिकरण के अधिकारों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण रद्द या समाप्त हो जाता है, तो विदेशी अंशदान से हासिल संपत्तियां और उनसे जुड़ी परिसंपत्तियां प्राधिकरण के नियंत्रण में जा सकती हैं।
पॉल ने कहा कि इस तरह के प्रावधान से ईसाई, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित संस्थानों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि कई संस्थान दशकों से गरीबों और जरूरतमंदों के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने मोदी सरकार से प्रस्तावित प्रावधान को हटाने की अपील करते हुए कहा, “ईसाई धर्मार्थ संस्थानों और खरबों डॉलर की संपत्तियों को मत छीनिए।”
FCRA विवाद पर डॉ. पॉल के साथ खड़े हुए टिम शीही
अमेरिकी सीनेटर टिम शीही ने डॉ. के. ए. पॉल की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर “100 प्रतिशत” उनके साथ हैं। शीही ने बताया कि स्पीकर जॉनसन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी डॉ. पॉल का सम्मान करते हैं।
उन्होंने ईसाई समुदाय, मिशनरियों और चर्चों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया। शीही ने उम्मीद जताई कि धार्मिक संस्थानों और मिशनरियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
रिले मूर ने भी कानून पर उठाए सवाल
प्रस्तावित कानून को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में भी चिंता सामने आई है। कांग्रेस सदस्य रिले मूर ने इसके संभावित प्रभाव पर सवाल उठाते हुए इसे “ईसाइयों पर स्पष्ट हमला” करार दिया।
गरीबों और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए पॉल के कार्यों की प्रशंसा
वॉशिंगटन में डॉ. के. ए. पॉल के साथ बैठक के दौरान शीही ने उनके मानवीय और धार्मिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने गरीबों की मदद, सुसमाचार के प्रचार और दुनियाभर में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पॉल के प्रयासों की प्रशंसा की।
शीही ने कहा कि डॉ. पॉल स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं और दुनिया में आजादी के संघर्ष को आगे बढ़ा रहे हैं।
FCRA संशोधन पर पॉल और शीही की साझा चिंता
डॉ. के. ए. पॉल और अमेरिकी सीनेटर टिम शीही ने माना कि भारत को विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने का पूरा संप्रभु अधिकार है। हालांकि, दोनों ने कहा कि विदेशी अंशदान की निगरानी के नाम पर धार्मिक और धर्मार्थ संस्थानों की संपत्तियों को खतरा नहीं होना चाहिए।
पॉल बोले- मैंने अपनी कमाई से किए धर्मार्थ कार्य
डॉ. पॉल ने बताया कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से लाखों डॉलर स्कूलों, अनाथालयों और दया-गृहों के निर्माण में दान किए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन नहीं कराया।
पॉल और शीही ने सरकार से FCRA निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की अपील की, लेकिन धार्मिक अल्पसंख्यकों के संस्थानों और मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता
पॉल ने दावा किया कि दुनिया के करीब 200 देशों में मुस्लिम और ईसाई आबादी रहती है। उनके अनुसार, प्रस्तावित बदलावों से इन देशों में भारत की नई सरकार को लेकर भरोसा प्रभावित हो सकता है। उन्होंने दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत आबादी के ईसाई और मुस्लिम समुदायों से जुड़े होने का भी दावा किया।
ग्लोबल पीस इनिशिएटिव से जुड़े हैं पॉल
डॉ. के. ए. पॉल ने ग्लोबल पीस इनिशिएटिव सहित कई संगठनों की स्थापना की है। वह गरीबों और कमजोर वर्गों की सेवा करने वाले आस्था-आधारित संस्थानों के समर्थन में लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों पर भी चर्चा
FCRA संशोधन को लेकर अमेरिका में द्विदलीय स्तर पर बढ़ती चर्चा के बीच यह बैठक हुई। पॉल और शीही ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था-आधारित संस्थानों की सुरक्षा भारत और अमेरिका के व्यापक जन-से-जन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है।
