HRDS India और नीदरलैंड के Arcadis ने सतत विकास, जनजातीय आवास, कचरा प्रबंधन और पूर्वोत्तर भारत की परियोजनाओं पर सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है
नई दिल्ली: एचआरडीएस इंडिया ने भारत में सतत और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए नीदरलैंड स्थित आर्काडिस के साथ रणनीतिक सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है। दोनों संगठन ग्रामीण विकास, जनजातीय आवास, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर साथ काम करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
एचआरडीएस इंडिया द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय विकास कार्यक्रम के तहत 1 अरब यूरो तक के निवेश और विकास कार्यों की योजना पर विचार किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में पूर्वोत्तर भारत को विशेष प्राथमिकता देने की योजना है। सतत कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण भी कार्यक्रम के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल होंगे।
प्रस्तावित सहयोग में एचआरडीएस इंडिया के जमीनी अनुभव और स्थानीय समुदायों के साथ उसके काम को आर्काडिस की इंजीनियरिंग, डिजाइन, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और परियोजना विकास विशेषज्ञता से जोड़ा जाएगा।
यह पहल एचआरडीएस इंडिया के संस्थापक और सचिव अजी कृष्णन तथा आर्काडिस के मुख्य परिचालन अधिकारी हंस डेकर के बीच एम्स्टर्डम में हुई बैठक के बाद सामने आई। बैठक में एचआरडीएस इंडिया की विकास परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के लिए किए जा रहे कार्यों पर चर्चा हुई।
दोनों पक्ष किफायती और टिकाऊ आवास, जनजातीय आवास, सामुदायिक सुविधाओं, मिट्टी की जांच, कृषि विकास, ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
जनजातीय आवास परियोजना प्रस्तावित सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र हो सकती है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और जनजातीय समुदायों के लिए किफायती तथा पर्यावरण के अनुकूल घर विकसित करना है। आर्काडिस इस क्षेत्र में डिजाइन, टिकाऊ निर्माण और बुनियादी ढांचे की योजना से जुड़ी तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकता है।
आर्काडिस ने अपने सहयोगियों और विशेषज्ञों की टीम को एचआरडीएस इंडिया के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय भेजने में भी रुचि दिखाई है। प्रस्तावित दौरे के दौरान मौजूदा और आगामी परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही तकनीकी जरूरतों और संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम में टिकाऊ कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। दोनों संगठन ऐसे समाधान विकसित करने पर विचार कर रहे हैं जिन्हें स्थानीय स्तर पर लागू करने के बाद बड़े स्तर पर दोहराया जा सके और उनके परिणामों को मापा जा सके।
अजी कृष्णन ने कहा कि जमीनी अनुभव को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता, तकनीक और मजबूत साझेदारी से जोड़कर टिकाऊ विकास के नए अवसर बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन, ग्रामीण विकास, जनजातीय आवास और सामुदायिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने से पूर्वोत्तर सहित देश के अन्य हिस्सों में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
दोनों पक्ष अब संभावित परियोजनाओं, तकनीकी जरूरतों और सहयोग के ढांचे पर अगले चरण की बातचीत करेंगे।
