नई दिल्ली: आज Kumunjayi Little Baby का नाम ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हर शख्स की जुबान पर है। यह ह्रदय विदारक नाम एक पाँच साल की बच्ची को दिया गया है जिसकी मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया।
यह बच्ची वारलपिरी जनजाति (स्वदेशी जनजाति) की है जो कि ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र में पायी जाती है। इस जनजाति में जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो शोक मनाने के लिए उस व्यक्ति को नया नाम दिया जाता है। यह नया नाम उस व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करना और असली पहचान छुपाने के लिए दिया जाता है।
क्या हुआ था Kumunjayi Little Baby के साथ?
पिछले महीने के अंतिम शनिवार यानी कि 25 अप्रैल की रात को एक 5 साल की बच्ची को ऑस्ट्रेलिया के ऐलिस स्प्रिंग्स के बाहरी इलाके में स्थित इलिपेरेन्ये (ओल्ड टाउन) टाउन कैंप के एक घर से कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था।पुलिस के अनुसार, आरोपी जेफरसन लुईस (47) बच्ची को अपने साथ ले गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लुईस कुछ दिन पहले ही जेल से रिहा हुआ था और वह उसी घर में रह रहा था, जहां बच्ची मौजूद थी।इसके बाद नॉर्दर्न टेरिटरी के हालिया इतिहास में सबसे बड़े सर्च ऑपरेशनों में से एक शुरू हुआ। सैकड़ों स्वयं सेवकों और पुलिसकर्मियों ने पांच दिनों तक कठिन
परिस्थितियों में घने झाड़ियों वाले इलाके में बच्ची की तलाश की जहां लंबी घास, नरम रेत और भीषण गर्मी जैसी चुनौतियां थीं। गुरुवार, 30 अप्रैल को तलाशी अभियान के दौरान खोजी टीम को एक शव मिला, जिसे लापता बच्ची का माना जा रहा था।
उसी रात पुलिस ने लुईस को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद उस पर हत्या का आरोप लगाया गया। इस बच्ची की मौत को सरकार की नाकामियों के तौर पर देखा जा रहा है जिसकी वजह से पूरे देश में शोक के साथ गुस्से का माहौल भी देखा गया।
कुमनजई लिटिल बेबी की मौत के बाद भड़की हिंसा
ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने 30 अप्रैल को कहा, “ऐलिस स्प्रिंग्स में लापता हुई छोटी बच्ची के मामले का इतना दुखद अंत होने से हमारा दिल टूट गया है। परिवार की इच्छा के अनुसार, बच्ची को Kumunjayi Little Baby कहकर संबोधित किया जा रहा है।
वह सिर्फ पांच साल की थी। उसकी जिंदगी की यात्रा तो अभी शुरू ही हुई थी। यह वही दुखद अंत है, जिसकी हम सभी उम्मीद नहीं कर रहे थे।” स्थानीय लोगों ने टाउन कैंप के बाहर गुलाबी फूल, टेडी बियर और भावुक संदेश रखे हैं —क्योंकि गुलाबी रंग उस बच्ची का पसंदीदा रंग था।
उसकी याद में सूर्यास्त के समय एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने की योजना बनाई गई है, जबकि राष्ट्रीय स्वदेशी जनजाति चाइल्ड केयर संस्था (SNAICC) के माध्यम सेपरिवार के लिए लगातार आर्थिक सहायता और दान भेजे जा रहे हैं।
