चैत्र नवरात्रि 2026 के तीसरे दिन 21 मार्च को माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है। जानें उनकी कथा, पूजा विधि, मंत्र, भोग और किस रंग के कपड़े पहनें।
नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि 2026 का तीसरा दिन यानी 21 मार्च, शनिवार — और इस दिन पूजी जाती हैं नवदुर्गा की तीसरी शक्ति, माँ चंद्रघंटा। जिनके माथे पर घंटे जैसा अर्धचंद्र सजा है, जिनकी दस भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र हैं और जो सिंह पर सवार होकर भक्तों के सारे भय हर लेती हैं। माँ चंद्रघंटा का स्वरूप उतना ही शांत है जितना शक्तिशाली — और यही उनकी सबसे बड़ी खासियत है।
माँ चंद्रघंटा कौन हैं?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने ब्रह्मचारिणी रूप में कठोर तपस्या की और भगवान शिव को पति के रूप में पाया। शादी के बाद जब वे कैलाश पर्वत पर बस गईं, तब उन्होंने अपने माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण किया — और इसी वजह से वे “चंद्रघंटा” कहलाईं।
कुछ कथाओं के अनुसार, असुरों और नकारात्मक शक्तियों से अपने परिवार और भक्तों की रक्षा के लिए उन्होंने यह उग्र लेकिन सौम्य योद्धा रूप धारण किया। उनकी घंटी जैसी दिव्य ध्वनि बुराई को दूर भगाती है और घर में शांति लाती है। माँ चंद्रघंटा हमें सिखाती हैं कि एक माँ का प्यार उतना ही कोमल हो सकता है जितना कि जरूरत पड़ने पर कठोर।
कैसा है माँ चंद्रघंटा का स्वरूप?
माँ चंद्रघंटा का रंग सोने जैसा दमकता है। उनकी तीन आँखें और दस भुजाएँ हैं, और वे सिंह पर विराजमान हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार, धनुष-बाण, कमल, कमंडल, रुद्राक्ष माला और घंटा है। दो हाथ अभयमुद्रा और वरदमुद्रा में हैं — यानी एक हाथ कह रहा है “डरो मत”, दूसरा कह रहा है “माँगो, दूँगी।”
उनके माथे पर अर्धचंद्र की आकृति घंटे जैसी है, जिसकी गूँज नकारात्मकता, बुरी नजर और ग्रह दोषों को दूर करती है। उनका यह रूप बताता है कि असली ताकत शोर में नहीं, शांति में होती है।
क्या मिलता है माँ चंद्रघंटा की पूजा से ?
माँ चंद्रघंटा की भक्ति करने से जीवन के कई पहलू सँवरते हैं:
हर तरह का भय और डर दूर होता है। बुरी नजर, काला जादू और शुक्र ग्रह के दोष खत्म होते हैं। घर में सुख-समृद्धि और पारिवारिक सामंजस्य बना रहता है। मुश्किल फैसलों में साहस और मन में स्थिरता आती है। रुके हुए काम बनने लगते हैं और आत्मिक जागरण होता है।
चैत्र नवरात्रि तीसरे दिन की पूजा विधि — घर पर ऐसे करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और ग्रे (स्लेटी) रंग के कपड़े पहनें — यह रंग शांति और संतुलन का प्रतीक है।
कलश को ताजे जल और फूलों से सजाएँ। माँ चंद्रघंटा को चमेली के फूल अर्पित करें क्योंकि यह उनका सबसे प्रिय फूल है। भोग में खीर, दूध से बनी मिठाई, फल और पंचामृत चढ़ाएँ। घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।
यह मंत्र 108 बार जपें:
“ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः”
इसके बाद यह स्तुति पढ़ें:
“पिण्डप्रसूनधवलां धारयन्तीं त्रिशूलं… चन्द्रघण्टां नमामि ॥”
या फिर “या देवी सर्वभूतेषु… चंद्रघंटायै नमः” का पाठ करें।
परिवार के साथ मिलकर उनकी कथा सुनाएँ। आरती करें और दिन में किसी जरूरतमंद की मदद जरूर करें। व्रत में सात्विक भोजन लें और ध्यान के लिए कुछ वक्त निकालें।
बीज मंत्र भी कर सकते हैं जाप
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः”
इस चैत्र नवरात्रि, माँ चंद्रघंटा की घंटी की गूँज को अपने दिल में महसूस करें। जो डर आपको रोक रहा है, जो उलझन आपको थका रही है — आज उसे माँ के चरणों में रख दें। माँ का वादा है — जो सच्चे मन से उन्हें पुकारता है, वो कभी अकेला नहीं होता।
