सीएम ममता बनर्जी ने बंगाल के राज्यपाल बदलाव पर उठाए सवाल

सीएम ममता बनर्जी ने बंगाल के राज्यपाल बदलाव पर उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस की अचानक विदाई और आर.एन. रवि की नियुक्ति को राजनीतिक साजिश बताया है। उनका आरोप है कि 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है।

नई दिल्ली: बंगाल की राजनीति इन दिनों अपने चर्चे पर है। 2026 विधानसभा चुनाव — जो अप्रैल-मई में होने की उम्मीद है — से कुछ ही हफ्ते पहले, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर एक बड़ा हमला बोला है। निशाने पर है राज्यपाल की अचानक और विवादित बदली, जिसे ममता बनर्जी महज एक प्रशासनिक फेरबदल मानने से साफ इनकार करती हैं।

कैसे हुई विवाद की शुरुआत?

5 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अचानक अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया। सूत्रों से बोस ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए कहा — “हाँ, मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैं साढ़े तीन साल से बंगाल का राज्यपाल रहा हूँ, अब यही काफी है।” उन्होंने इस्तीफे की वजह बताने से इनकार कर दिया और किसी राजनीतिक दबाव की बात पर भी चुप्पी साधे रहे।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन करके सूचित किया कि तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को अब पश्चिम बंगाल का अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा।

ममता का तीखा हमला

ममता बनर्जी ने कोई लाग-लपेट नहीं रखा। धर्मतला में अपने पाँच दिवसीय धरने के आखिरी दिन, जो उन्होंने मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ किया था, उन्होंने समर्थकों से कहा — “अगर इसमें कुछ गड़बड़ नहीं थी, तो एक महीने पहले राज्यपाल क्यों बदले गए?”

X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में ममता ने लिखा कि वह बोस के अचानक इस्तीफे से “हैरान और गहरी चिंता में” हैं और उन्होंने यह भी नहीं नकारा कि चुनाव से पहले गृह मंत्री के इशारे पर उनसे इस्तीफा लिया गया हो।


इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने नए राज्यपाल की नियुक्ति में राज्य सरकार से परामर्श करने की स्थापित परंपरा को तोड़ा है, जो राज्य की गरिमा के साथ खिलवाड़ है।

आर.एन. रवि कौन हैं — और ममता क्यों हैं परेशान?

आर.एन. रवि यानी रवींद्र नारायण रवि, 1976 बैच के केरल कैडर के IPS अधिकारी हैं और भारत के सुरक्षा व खुफिया तंत्र में लंबा अनुभव रखते हैं।
लेकिन उनका पिछला रिकॉर्ड TMC के लिए चिंता की वजह बना हुआ है। 2022 से तमिलनाडु के राज्यपाल रहते हुए उनका DMK सरकार के साथ बार-बार टकराव हुआ — राष्ट्रगान विवाद से लेकर विधानसभा द्वारा पारित ज़रूरी विधेयकों पर मंजूरी रोकने तक। ममता ने रवि को “BJP का कैडर” और “BJP का तोता” तक कह दिया और सीधे चेतावनी दी — “तमिलनाडु में जो मन आया वो किया, लेकिन बंगाल में वो नहीं चलेगा।”

राजनीतिक विश्लेषक सुमन चट्टोपाध्याय ने कहा — “आनंद बोस सिर्फ बातों वाले राज्यपाल थे, TMC उन्हें संभाल चुकी थी। लेकिन रवि का रिकॉर्ड देखकर TMC डरी हुई है। एक सक्रिय राज्यपाल BJP के चुनाव प्रचार को नई ताकत दे सकता है और सरकार विरोधी माहौल को हवा दे सकता है।”

मतदाता सूची और “बंगाल को बांटने” की साजिश

ममता का धर्मतला धरना सिर्फ राज्यपाल के मुद्दे तक सीमित नहीं था। TMC का आरोप है कि चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के तहत हजारों असली बांग्लाभाषी मतदाताओं को जानबूझकर मतदाता सूची से हटाया जा रहा है। ममता ने राज्यपाल बदलाव को इसी बड़ी साजिश से जोड़ा है।

TMC प्रवक्ता महुआ मोइत्रा ने X पर लिखा कि बिना राज्य से सलाह लिए एकतरफा राज्यपाल नियुक्ति संवैधानिक संघवाद का मज़ाक है और राजभवनों को “BJP के वॉर रूम” में बदला जा रहा है। वरिष्ठ TMC नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने याद दिलाया कि सरकारिया और पुंछी आयोग दोनों ने कहा था कि राज्यपाल नियुक्ति से पहले राज्य सरकार से सलाह लेना लोकतंत्र और संघवाद की बुनियाद है।

राजनीतिक तूफान के बावजूद, बाहर जाते हुए राज्यपाल बोस का लहजा संयमित रहा। ममता ने धरना खत्म करने के बाद उनसे मुलाकात की और उन्हें “विद्वान और प्रतिष्ठित व्यक्ति” बताते हुए शुभकामनाएं दीं। बोस ने कहा कि उनके इस्तीफे की वजह “सही वक्त आने पर” बताई जाएगी — जिससे आने वाले समय में कई खुलासों की संभावना बनी हुई है।

चुनाव से कुछ ही हफ्ते दूर, राज्यपाल की इस बदली ने पहले से गर्म सियासी माहौल में और आग लगा दी है। क्या आर.एन. रवि की राजभवन में एंट्री बंगाल का राजनीतिक समीकरण बदलेगी — या यह बस एक और टकराव का मोर्चा बनेगा — यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ है: बंगाल की सियासत का यह खेल अभी शुरू ही हुआ है।

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