चैत्र नवरात्रि 2026 के छठे दिन 24 मार्च को माँ कात्यायनी की होगी पूजा । जानें महिषासुर मर्दिनी की कथा, पूजा विधि, मंत्र, भोग और विवाह में आ रही बाधाएँ कैसे होती हैं दूर।
नई दिल्ली: जब सारे देवता मिलकर भी महिषासुर को नहीं हरा पाए, तब उनके संयुक्त तेज से एक देवी प्रकट हुईं — माँ कात्यायनी। न डर, न झिझक, सीधे युद्ध के मैदान में उतरीं और उस महाशक्तिशाली असुर का अंत कर दिया। चैत्र नवरात्रि 2026 का छठा दिन यानी 24 मार्च, मंगलवार को होगी माँ कात्यायनी की पूजा हर उस इंसान के लिए है जो डर से लड़ रहा है, अन्याय सह रहा है या जिंदगी की किसी भी बड़ी रुकावट को पार करना चाहता है।
माँ कात्यायनी कौन हैं?
पुराणों के अनुसार, महिषासुर नाम के असुर को वरदान था कि कोई देवता या मनुष्य उसे नहीं मार सकता। उसके अत्याचार से देवलोक और धरती दोनों त्राहि-त्राहि कर रहे थे। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित सभी देवताओं के क्रोध और तेज से एक महाशक्ति प्रकट हुई — माँ कात्यायनी।
महर्षि कात्यायन के आश्रम में जन्म लेने के कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। उन्होंने भीषण युद्ध में महिषासुर का वध किया और धर्म की पुनर्स्थापना की। यही वजह है कि उन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहते हैं। उनकी यह कथा बताती है कि चाहे बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, साहस और सच्चाई की जीत हमेशा होती है।
कैसा है माँ कात्यायनी का दिव्य स्वरूप?
माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हैं और उनकी चार भुजाएँ हैं। ऊपर के एक हाथ में चमकती तलवार है जो बुराई और अज्ञान का नाश करती है, दूसरे में कमल का फूल है जो पवित्रता का प्रतीक है। नीचे के दोनों हाथ अभयमुद्रा और वरदमुद्रा में हैं — एक कह रहा है “डरो मत” और दूसरा कह रहा है “माँगो, मिलेगा।”
उनका रंग सुनहरा और तेजस्वी है, बाल घने और काले हैं, और चेहरे पर एक ऐसा भाव है जो एक साथ उग्र भी है और करुणामयी भी। उनकी तीसरी आँख यानी आज्ञा चक्र की ऊर्जा से भक्तों की अंतरात्मा जागती है और सही-गलत की पहचान होती है।
माँ कात्यायनी की पूजा से क्या मिलता है?
माँ कात्यायनी की भक्ति जीवन की हर उलझन को सुलझाने में मदद करती है:
जीवन में जो भी बाधाएँ हैं, खासकर विवाह में देरी या मांगलिक दोष — वो दूर होते हैं। अविवाहित लड़कियों को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है। मन का डर, कमजोरी और नकारात्मकता खत्म होती है। पिछले पापों से मुक्ति और जीवन में धर्म का मार्ग खुलता है। रिश्तों में सामंजस्य और घर में सुख-शांति आती है।
छठे दिन की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और लाल रंग के कपड़े पहनें — यह रंग शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक है और माँ कात्यायनी को विशेष प्रिय है।
कलश को ताजे जल और लाल फूलों से सजाएँ। माँ को लाल फूल, शहद, खीर, मिठाई, दूध और फल अर्पित करें। शहद का भोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। कुमकुम और हल्दी भी चढ़ाएँ। घी का दीपक और गुलाब की अगरबत्ती जलाएँ।
फिर पूरे मनोयोग से यह मंत्र 108 बार जपें:
“ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”
इसके बाद यह स्तुति पढ़ें:
“चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना । कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥”
परिवार के साथ महिषासुर वध की कथा सुनाएँ और आरती करें। आज के दिन आज्ञा चक्र पर ध्यान करना या किसी कमजोर की मदद करना माँ को बेहद प्रसन्न करता है।
बीज मंत्र से करें विशेष साधना
अधिक फल पाने के लिए इस बीज मंत्र का जाप करें:
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायन्यै नमः”
विवाह में रुकावट है तो जरूर करें यह उपाय
माँ कात्यायनी को विशेष रूप से उन युवतियों की माँ माना जाता है जो अच्छे जीवनसाथी की तलाश में हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि गोपियों ने भी श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए माँ कात्यायनी की ही पूजा की थी। अगर शादी में देरी हो रही है या मांगलिक दोष परेशान कर रहा है, तो आज के दिन लाल फूल और शहद चढ़ाकर सच्चे मन से प्रार्थना करें।
इस चैत्र नवरात्रि माँ कात्यायनी से यही माँगें — वो हिम्मत जो डर को पीछे धकेल दे, वो ताकत जो हर रुकावट को रास्ते से हटा दे। जैसे उन्होंने महिषासुर का अंत किया, वैसे ही आपकी जिंदगी की हर तकलीफ का भी अंत होगा।
