दस्तावेज जांच के बाद कोई अनियमितता नहीं पाई गई
केरल: पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा 15 मार्च को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए जाने के साथ ही संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई। इसके साथ ही चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय लेन-देन पर निगरानी और अधिक सख्त कर दी गई है। इसी क्रम में केरल से एक मामला सामने आया, जहां आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद किए गए एक बड़े नकद लेन-देन ने चुनाव अधिकारियों और आयकर विभाग का ध्यान आकर्षित किया।
जानकारी के अनुसार, 16 मार्च को—आचार संहिता लागू होने के अगले ही दिन—कृष्णागिरी जिले के निवासी डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने अपनी पत्नी रागिन मारिया के Axis Bank खाते से ₹12 लाख की नकद निकासी की। इसी दिन लगभग ₹7.50 लाख मूल्य का सोना भी खरीदा गया।
चुनावी अवधि के दौरान असामान्य नकदी प्रवाह पर विशेष नजर रखी जाती है, जिसके चलते इन लेन-देन को जांच के दायरे में लिया गया। इसके बाद आयकर विभाग ने डॉ. मल्लप्पा से संपर्क कर निकासी पर्ची, खरीद के बिल और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा।
नियमों के अनुसार, आचार संहिता के दौरान व्यक्ति अपने बैंक खाते से किसी भी राशि की निकासी कर सकता है, लेकिन ₹10 लाख या उससे अधिक की निकासी की सूचना स्वतः आयकर विभाग को भेजी जाती है। वहीं ₹50,000 से अधिक नकद राशि बिना वैध दस्तावेज के साथ ले जाने पर चुनाव निगरानी दल द्वारा उसे जब्त किया जा सकता है।
डॉ. मल्लप्पा, जो एक प्रतिष्ठित सोशल प्रेन्योर के रूप में जाने जाते हैं, ने स्पष्ट किया कि यह निकासी और खरीदारी उनके परिवार में होने वाले बहन के विवाह की तैयारियों के लिए की गई थी। आवश्यक दस्तावेज और बिल प्रस्तुत करने के बाद जांच पूरी हुई और मामले में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
इस संबंध में डॉ. मल्लप्पा ने कहा कि यह लेन-देन पूरी तरह पारिवारिक जरूरत के तहत किया गया था और उन्होंने सभी नियमों का पालन किया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि वे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हमेशा सहयोग करते रहे हैं और आगे भी सभी नियमों का पालन करते रहेंगे।
डॉ. मल्लप्पा एक जिम्मेदार नागरिक और नियमित करदाता हैं, जिनके खिलाफ पहले किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का कोई रिकॉर्ड नहीं है। उनके द्वारा समय पर और पारदर्शी तरीके से दस्तावेज उपलब्ध कराने के कारण जांच प्रक्रिया बिना किसी विलंब के पूरी हो सकी।
यह मामला दर्शाता है कि चुनावी आचार संहिता के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निगरानी कितनी सख्त होती है। निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए वैध वित्तीय गतिविधियां भी जांच के दायरे में लाई जाती हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है।
