भारत का सबसे रंगीन त्योहार होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत और प्रेम का प्रतीक है। आइए जानते हैं ब्रज से केरल तक की विविध होली कथाएं।
नई दिल्ली: होली हमारे देश का एक ऐसा त्यौहार है जो सभी तरह के भेदभाव को मिटा देता है। यह त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और वसंत ऋतु की शुरुआत का संकेत देता है।
होली दो मुख्य हिस्सों में मनाई जाती है: होलिका दहन और धुलेंडी। होलिका दहन बुराई के नाश और शुद्धि का प्रतीक है, जबकि धुलेंडी रंगों और खुशियों से भरा होता है। यह त्यौहार लोगों को एक दूसरे के साथ मिलने और खुशियों का जश्न मनाने का अवसर देता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के मानचित्र पर हर कुछ सौ किलोमीटर पर होली का रंग बदल जाता है? कहीं लाठियां चलती हैं, तो कहीं फूलों की वर्षा होती है। चलिए, भारत के इस सांस्कृतिक सफर पर निकलते हैं।
1. उत्तर प्रदेश: ब्रज की लठमार और फूलों वाली होली
ब्रज की होली विश्व प्रसिद्ध है। मथुरा, वृंदावन और बरसाना में होली केवल एक दिन का त्यौहार नहीं, बल्कि हफ्तों चलने वाला उत्सव है।
लठमार होली एक बहुत ही अनोखा और रंगीन त्योहार है, जो बरसाना और नंदगांव में मनाया जाता है। इस दौरान, महिलाएं लाठियों से पुरुषों को मारती हैं और पुरुष ढाल का उपयोग करके अपना बचाव करते हैं। यह पूरा आयोजन राधा और कृष्ण के प्रेम की नोक-झोंक का एक जीवंत प्रदर्शन है, जो उनके प्रेम की गहराई और मजाकिया तरीके से पेश किया जाता है। यह त्योहार न केवल रंगों और खुशियों से भरा होता है, बल्कि यह राधा और कृष्ण के प्रेम की कहानी को भी याद दिलाता है।
फूलों वाली होली: वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में रंगों की जगह ताजे फूलों से होली खेली जाती है, जो पर्यावरण और भक्ति दोनों के अनुकूल है।
2. बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश: फगुआ का उल्लास
यहाँ होली को ‘फगुआ’ कहा जाता है। लोक गीतों (चैता और होरी) की गूंज, ढोलक की थाप और भांग की ठंडाई यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। यहाँ ‘होली मिलन’ की परंपरा है, जहाँ लोग एक-दूसरे के गले मिलते हैं और बड़ों के पैरों पर गुलाल लगाकर आशीर्वाद लेते हैं। मालपुआ और दही-बड़े यहाँ के पकवानों की जान हैं।
3. पश्चिम बंगाल: डोल जात्रा और बसंत उत्सव
बंगाल में होली को ‘डोल पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है। शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू किया गया ‘बसंत उत्सव’ आज भी अपनी सांस्कृतिक गरिमा के लिए जाना जाता है। यहाँ पीले रंग के वस्त्र पहने लोग नृत्य और संगीत के साथ राधा-कृष्ण की पालकी निकालते हैं।
4. पंजाब: होला मोहल्ला
सिखों के लिए होली ‘वीरता’ का उत्सव है। आनंदपुर साहिब में ‘होला मोहल्ला’ के दौरान निहंग सिख घुड़सवारी, तलवारबाजी और पारंपरिक युद्ध कौशल (गतका) का प्रदर्शन करते हैं। यह रंगों के साथ-साथ शक्ति प्रदर्शन का भी अनूठा संगम है।
5. राजस्थान: शाही होली (Royal Holi)
राजस्थान में होली का स्वरूप राजसी होता है। उदयपुर और जयपुर के राजघरानों में आज भी पारंपरिक तरीके से होलिका दहन और भव्य जुलूस निकाले जाते हैं। हाथियों और घोड़ों को सजाया जाता है और लोक नर्तक ‘घूमर’ व ‘कालबेलिया’ की प्रस्तुति देते हैं।

6. उत्तराखंड: कुमाऊंनी होली (बैठकी और खड़ी)
पहाड़ों की होली संगीत प्रधान होती है।
बैठकी होली में लोग मंदिरों और घरों में एकत्र होकर शास्त्रीय रागों पर आधारित होली के गीत गाते हैं। यह परंपरा होली के त्योहार को और भी खास बनाती है।
खड़ी होली: गांवों के लोग सफेद कुर्ता-पायजामा और टोपी पहनकर घर-घर जाकर नृत्य करते हैं और खुशियां बांटते हैं।
7. गोवा: शिग्मो (Shigmo)
समुद्र के किनारे बसे गोवा में होली को ‘शिग्मो’ कहा जाता है। यह कृषकों का त्योहार है। यहाँ बड़े-बड़े जुलूस निकलते हैं जिनमें पौराणिक कथाओं की झांकियां दिखाई जाती हैं। पारंपरिक लोक नृत्य ‘घोड़े मोडनी’ यहाँ का मुख्य आकर्षण है
8. मणिपुर: याओसांग (Yaosang)
मणिपुर में होली छह दिनों तक चलती है। यहाँ ‘थबल चोंगबा’ (चांदनी रात में नृत्य) किया जाता है। साथ ही, बच्चों के लिए खेलकूद की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जो इसे एक सामुदायिक उत्सव बना देती हैं।
9. महाराष्ट्र और गुजरात: रंग पंचमी और धुलेटी
महाराष्ट्र में, होली का त्योहार ‘शिमगा’ के नाम से मनाया जाता है। इस त्योहार के पांचवें दिन ‘रंग पंचमी’ का आयोजन होता है, जिसमें लोग रंगों का असली आनंद लेते हैं। महाराष्ट्र में होली के दौरान पूरन पोली एक मुख्य व्यंजन होता है जिसे लोग बहुत पसंद करते हैं।
गुजरात: यहाँ ‘मटकी फोड़’ की परंपरा बहुत प्रसिद्ध है, जहाँ माखन की मटकी को काफी ऊंचाई पर लटकाया जाता है और युवक मानव पिरामिड बनाकर उसे तोड़ते हैं।
10. दक्षिण भारत: कामदहनम और उकुली
दक्षिण में होली का स्वरूप थोड़ा अलग और शांत है।
कर्नाटक और तेलंगाना में एक अनोखी परंपरा है। यहाँ कामदेव के बलिदान को याद करते हुए ‘कामदहनम’ किया जाता है। यह आयोजन कामदेव की याद में किया जाता है, जो प्रेम और काम के देवता माने जाते हैं। इस दिन लोग कामदेव की कहानी को याद करते हैं और उनके बलिदान को सम्मान देते हैं। यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो प्रेम और समर्पण की भावना को बढ़ावा देता है।
केरल: यहाँ कुडुम्बी समुदाय ‘मंजल कुली’ मनाता है, जिसमें हल्दी के पानी का उपयोग किया जाता है। यह प्रकृति के करीब और शुद्धता का प्रतीक है।
गुजिया से ठंडाई तक
बिना खाने-पीने के भारत का कोई भी त्यौहार अधूरा है। होली पर गुजिया की मिठास, ठंडाई का नशा (अक्सर भांग के साथ), कांजी वड़ा, और शक्करपारे हर घर की शोभा बढ़ाते हैं। आजकल ‘इको-होली’ का चलन भी बढ़ा है, जहाँ लोग प्राकृतिक रंगों और फूलों का उपयोग कर पर्यावरण को बचाने का संदेश दे रहे हैं।

होली प्रेम और एकता का वह सूत्र है जो पूरे भारत को एक रंग में रंग देता है। 2026 में सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों के साथ इस महापर्व का आनंद लें। बुरा न मानो होली है!
