12 घंटे 46 मिनट में उहुरू पीक पहुंचीं कविता चंद, बनाया भारतीय रिकॉर्ड

12 घंटे 46 मिनट में उहुरू पीक पहुंचीं कविता चंद, बनाया भारतीय रिकॉर्ड

कविता चंद ने 12 घंटे 46 मिनट में माउंट किलिमंजारो की उहुरू पीक फतह की। उन्होंने चढ़ाई और वापसी का सफर 22 घंटे 36 मिनट में पूरा किया

नई दिल्ली: भारतीय पर्वतारोही कविता चंद ने माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई में नया कीर्तिमान बनाया है। उन्होंने 5,895 मीटर ऊंची उहुरू पीक तक पहुंचने में 12 घंटे 46 मिनट लगाए। इसके बाद वह वापस शुरुआती स्थान पर लौटीं और पूरा अभियान 22 घंटे 36 मिनट में खत्म किया।

इस उपलब्धि के साथ वह 24 घंटे से कम समय में किलिमंजारो की चढ़ाई और वापसी पूरी करने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। उन्होंने म्वेका गेट से अपनी यात्रा शुरू की थी।

आमतौर पर पांच से नौ दिन लगते हैं

माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई सामान्य तौर पर पांच से नौ दिनों में पूरी होती है। पर्वत की ऊंचाई और वहां ऑक्सीजन की कमी के कारण पर्वतारोहियों को शरीर को अनुकूल बनाने के लिए समय देना पड़ता है।

कविता ने इस चुनौती को कम समय में पूरा करने के लिए लंबे समय तक तैयारी की। उन्होंने अपनी सहनशक्ति बढ़ाने के लिए दौड़ और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया।

शिकागो मैराथन में भी दिखाया दम

कविता ने 11 अक्टूबर को शिकागो मैराथन में हिस्सा लिया था। इसके लिए उन्होंने तीन महीने तक नियमित अभ्यास किया। वह हर सप्ताह 70 से 90 किलोमीटर दौड़ती थीं और सप्ताह में तीन बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती थीं।

मैराथन में उन्होंने भारतीय महिलाओं के बीच तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने नेपाल में हिमलुंग हिमाल अभियान में हिस्सा लिया और करीब 6,600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचीं।

अभियान में स्थानीय टीम ने की मदद

बूट्स एंड क्रैम्पन्स के भरत और रोमिल ने तंजानिया की स्थानीय टीम के साथ मिलकर अभियान की योजना बनाई। टीम ने रास्ते, जरूरी सामान और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं संभालीं।

कविता के पहुंचने से पहले 4,673 मीटर की ऊंचाई पर बाराफू कैंप तैयार किया गया था। चढ़ाई और वापसी के दौरान गाइड तथा समिट पोर्टर ने उनकी सहायता की।

सेवन समिट्स यात्रा का पांचवां पड़ाव

किलिमंजारो कविता की सेवन समिट्स यात्रा का पांचवां पर्वत है। वह इससे पहले एल्ब्रुस, डेनाली, विंसन और एकॉनकागुआ पर चढ़ाई कर चुकी हैं।

इसके अलावा, कविता छह वर्ल्ड मैराथन मेजर में से पांच पूरी कर चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि पर्वतारोहण और लंबी दूरी की दौड़ में उनकी निरंतर तैयारी को दिखाती है।

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