MERI CIS के नेतृत्व में भारत-ताजिकिस्तान रोड एक्सपीडिशन शुरू हुआ। टीम ताजिकिस्तान में कनेक्टिविटी, व्यापार, संस्कृति और आर्थिक संभावनाओं का अध्ययन करेगी
दुशांबे, ताजिकिस्तान: भारत-ताजिकिस्तान रोड एक्सपीडिशन को दुशांबे के इस्माइल सोमोनी स्क्वायर से रवाना किया गया। भारत के राजदूत राजेश उइके ने अभियान को हरी झंडी दिखाई। MERI सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझ और लोगों के आपसी संपर्क को मजबूत करने पर केंद्रित है।
हरी झंडी दिखाने के कार्यक्रम में ताजिकिस्तान में यूनेस्को की महासचिव और विदेश मंत्रालय के यूनेस्को डिवीजन की प्रमुख जुल्फिया बुरहोन, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक रिसर्च के निदेशक प्रो. उस्मोनजोडा, इंडोलॉजी विशेषज्ञ, शिक्षाविद और मीडिया प्रतिनिधि शामिल हुए।
अतिथियों ने अभियान को भारत-ताजिकिस्तान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। भारत में ताजिकिस्तान के राजदूत लुकमोन बोबोबकलोंजोडा ने भी अभियान टीम को शुभकामनाएं दीं।
यह पहल ताजिकिस्तान की स्वतंत्रता की 35वीं वर्षगांठ के बाद आयोजित हो रही है। अभियान का उद्देश्य दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देना है।
प्रो. रमाकांत द्विवेदी कर रहे हैं नेतृत्व
MERI CIS इस अभियान का संचालन प्रो. (डॉ.) रमाकांत द्विवेदी के नेतृत्व में कर रहा है। वह MERI CIS के प्रमुख और इंडिया-सेंट्रल एशिया फाउंडेशन के निदेशक हैं।
MERI ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के उपाध्यक्ष प्रो. ललित अग्रवाल और लव अग्रवाल भी अभियान दल का हिस्सा हैं।
7 से 21 सितंबर 2026 तक चलने वाला यह अभियान ताजिकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों को कवर करेगा। टीम सड़क यात्रा, क्षेत्रीय अध्ययन और स्थानीय संवाद के जरिए देश की कनेक्टिविटी, आर्थिक क्षमता और सांस्कृतिक विरासत को समझेगी।
परिवहन गलियारों और व्यापार का अध्ययन
टीम क्षेत्रीय परिवहन गलियारों की भूमिका का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही भारत और ताजिकिस्तान के साझा हितों को समझकर सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।
अभियान में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के व्यावहारिक तरीकों पर भी विचार किया जाएगा। MERI CIS संबंधित मंत्रालयों, दूतावासों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय कर रहा है।
यह होगा रोड एक्सपीडिशन का रूट
अभियान दुशांबे से बुख्तर (अजिना टेपे), कुलोब, दरवोज, खोरोग, इश्काशिम, कालाई खुम्ब, दंगारा, नुरेक, इस्कंदरकुल झील, पंजाकेंट और खोजेंट होते हुए वापस दुशांबे पहुंचेगा।
इस मार्ग से टीम ताजिकिस्तान की भौगोलिक विविधता, कनेक्टिविटी, सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक संभावनाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन करेगी।
अभियान भारत-मध्य एशिया संबंधों में शैक्षणिक संवाद, सांस्कृतिक सहयोग और संस्थागत संपर्क को बढ़ाने पर भी ध्यान देगा।
