संसद में पेश आंकड़ों से पता चला है कि UPI Fraud के मामले घटे हैं, लेकिन ठगी के बाद पैसा वापस मिलने की दर बेहद कम बनी हुई है।
18 दिसंबर 2025, नई दिल्ली
भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जहां एक तरफ UPI ने लेन-देन को आसान और तेज बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसके जरिए होने वाले फ्रॉड ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। संसद में सरकार द्वारा पेश किए गए ताजा आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाते हैं।
FY24 में UPI यूजर्स को लगा सबसे बड़ा झटका
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2024 UPI यूजर्स के लिए सबसे ज्यादा नुकसान वाला साल साबित हुआ। इस दौरान देशभर में करीब 13.42 लाख ऑनलाइन फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए, जिनमें लोगों के लगभग 1,087 करोड़ रुपये ठग लिए गए। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था, जिसने डिजिटल सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
अब घट रहे हैं फ्रॉड के मामले
हालांकि राहत की बात यह है कि इसके बाद हालात में कुछ सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025 में फ्रॉड के मामले घटकर 12.64 लाख रह गए और ठगी की रकम भी कम होकर 981 करोड़ रुपये हो गई। वहीं चालू वित्त वर्ष 2026 में नवंबर तक करीब 10.64 लाख मामले सामने आए हैं, जिनमें 805 करोड़ रुपये की ठगी हुई। इससे संकेत मिलता है कि सरकारी कदमों का असर दिखने लगा है।
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रिकवरी रेट अब भी बड़ी चिंता
फ्रॉड के मामलों में कमी के बावजूद सबसे बड़ी चिंता पैसा वापस मिलने को लेकर है। सरकार के मुताबिक अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच 92% शिकायतों पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई हुई, लेकिन सिर्फ 6% मामलों में ही ठगी की रकम वापस मिल पाई। यानी एक बार पैसा निकल गया तो उसे वापस पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
RBI और NPCI ने बढ़ाई सख्ती
फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए RBI और NPCI ने कई सख्त कदम उठाए हैं। RBI एक डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म लाने की तैयारी में है, जिससे बैंक और फिनटेक कंपनियां रियल-टाइम डेटा साझा कर सकें। वहीं NPCI ने नए डिवाइस लॉग-इन नियम, ट्रांजैक्शन लिमिट, कूलडाउन पीरियड और AI आधारित मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स लागू किए हैं, ताकि संदिग्ध लेन-देन को समय रहते रोका जा सके।
कुल मिलाकर, UPI फ्रॉड के मामलों में भले ही गिरावट आई हो, लेकिन सतर्कता अब भी बेहद जरूरी है, क्योंकि सावधानी ही इस डिजिटल ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
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Suditi Raje has a background in investigative journalism, with a career spanning over 6 years. As part of the Jankiawaz team, she are committed to exposing the truth and bringing to light the stories that matter most.
