नई दिल्ली: उत्तर भारत में पड़ रही भयंकर गर्मी की असली वजह सूर्य का कर्क रेखा पर पहुंचना है, जिससे धरती तेजी से गर्म हो रही है। हर साल इन दिनों उत्तर भारत में तेज गर्मी और लू पड़ने लगती है और तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि तेज गर्मी का पड़ना अचानक नहीं है, बल्कि खगोलीय, मौसमी और भौगोलिक कारणों से होता है।
सूर्य की सीधी किरणें और प्री मानसून पीरियड से बढ़ती गर्मी
मई के अंत और जून की शुरुआत में सूर्य कर्क रेखा के ऊपर आ जाता है। इस समय उत्तरी गोलार्ध, जहां भारत मौजूद है, वह भाग सूरज की ओर ज्यादा झुका हुआ होता है, जिसके कारण सूरज की किरणें भारत के मैदानी क्षेत्रों में सीधी पड़ रही हैं। इसके कारण जमीन तेजी से गर्म होती है। भारतीय मौसम विभाग आईएमडी के अनुसार इसे प्री मानसून मैक्सिमम हीटिंग पीरियड कहा जाता है।
45 डिग्री के पार तापमान, बढ़ रहा है हीट स्ट्रोक का खतरा
गर्मी में जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तो इंसान का शरीर ठंडा नहीं रह पाता है। 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। शरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता सीमित होती है और अधिक तापमान पर शरीर का कंट्रोल सिस्टम फेल होने लगता है, जिससे जान जाने का खतरा बन जाता है।
सूखी जमीन और गर्म हवाएं बढ़ा रही हैं भयंकर गर्मी
तेज गर्मी पड़ने के कारण जमीन सूखी पड़ने लगती है और सूखी मिट्टी की गर्मी सोखने की क्षमता कम हो जाती है। इसके कारण गर्मी और बढ़ जाती है। वहीं पेड़-पौधे सूखने लगते हैं, जिससे भाप बनने में कमी आती है और हवा में नमी नहीं बढ़ पाती है। गर्मी बढ़ने का एक और कारण राजस्थान और पाकिस्तान की ओर से चलने वाली हवाएं हैं, जो गर्मी को और बढ़ा देती हैं।
ग्लोबल वार्मिंग से और खतरनाक हो रही है गर्मी की समस्या
गर्मी का मुख्य कारण प्राकृतिक चक्र है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से यह और खतरनाक बनती जा रही है। मई और जून में भारत में गर्मी तेज होती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी और अधिक पड़ रही है। अगर हर साल ऐसे ही गर्मी रहेगी, तो 45-50 डिग्री की हीट वेव आम बात हो जाएगी।
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