ओटीटी, इंटरनेट और फ्री डिश के बढ़ते चलन ने भारत में पारंपरिक Television को झटका दिया है, जिससे लाखों दर्शक और नौकरियां प्रभावित हुई हैं।
30 दिसंबर 2025, नई दिल्ली
भारत में दशकों तक मनोरंजन और खबरों का सबसे भरोसेमंद माध्यम रहा Television अब धीरे-धीरे अपनी चमक खोता नजर आ रहा है। बीते छह वर्षों में करीब 4 करोड़ परिवारों ने केबल टीवी और डीटीएच कनेक्शन बंद कर दिए हैं। दर्शकों की आदतें बदल रही हैं और अब वे तय समय पर चलने वाले टीवी चैनलों की जगह अपनी सुविधा के हिसाब से कंटेंट देखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आज लोग स्क्रीन से दूर नहीं हुए हैं, बल्कि स्क्रीन का जरिया बदल गया है। इंटरनेट, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डीडी फ्री डिश जैसे विकल्पों ने पेड टीवी की पकड़ कमजोर कर दी है।
डिजिटल दर्शकों की तेजी से बढ़ती संख्या
कांतार की मीडिया कंपास रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, मार्च 2025 में Television देखने वालों की संख्या 70.5 करोड़ थी, जो सितंबर तक घटकर 68.9 करोड़ रह गई। सबसे अहम बदलाव यह है कि देश में 31.3 करोड़ लोग अब सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देख रहे हैं। यानी वे इंटरनेट का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन पारंपरिक Television चैनल बिल्कुल नहीं देखते। हैरानी की बात यह है कि इन डिजिटल-ओनली दर्शकों में से करीब 75% ग्रामीण इलाकों से हैं, जिन्हें कभी टीवी का सबसे मजबूत आधार माना जाता था।
DTH और केबल क्यों हो रहे हैं पीछे?
मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव की दो बड़ी वजहें हैं। शहरी और संपन्न वर्ग तेजी से नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, जियो सिनेमा जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहा है। वहीं मध्यम और कम आय वाले परिवार महंगे मासिक केबल बिल से बचने के लिए डीडी फ्री डिश जैसे मुफ्त विकल्प चुन रहे हैं।
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, 2019 में जहां निजी डीटीएच कंपनियों के ग्राहकों की संख्या 7.2 करोड़ थी, वहीं 2026 तक इसके घटकर 5.1 करोड़ से नीचे आने का अनुमान है।
यह भी पढ़े: Delhi में दो दिन घना कोहरा, यलो अलर्ट जारी; नए साल पर बारिश के आसार, ठंड और बढ़ाएगी कंपकंपी
विज्ञापन कमाई में भी टीवी पीछे
साल 2024 भारतीय मीडिया इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। पहली बार डिजिटल मीडिया की विज्ञापन कमाई ने Television को पीछे छोड़ दिया। विज्ञापनदाता अब ऐसे प्लेटफॉर्म्स को तरजीह दे रहे हैं, जहां उन्हें दर्शकों का सटीक डेटा और खरीदारी का विश्लेषण मिल सके। इसी वजह से कनेक्टेड Television और ई-कॉमर्स आधारित विज्ञापनों में तेजी आई है।
नौकरियों और चैनलों पर संकट
पेड Television की गिरावट का सीधा असर रोजगार पर भी पड़ा है। 2018 से 2025 के बीच केबल टीवी डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी करीब 5.7 लाख नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। इसके अलावा कई मीडिया कंपनियां घाटे में चल रहे चैनल बंद कर रही हैं। मार्च 2025 में ही जियोस्टार ने कॉमेडी सेंट्रल और MTV बीट्स समेत 11 चैनल्स को बंद करने का फैसला लिया।
क्या Television का पूरी तरह अंत हो जाएगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि Television पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन उसका स्वरूप जरूर बदल जाएगा। क्षेत्रीय चैनलों की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। आने वाले समय में IPTV और ओटीटी आधारित टीवी मॉडल ज्यादा देखने को मिलेंगे। टीवी अब शायद रेडियो की तरह एक सीमित लेकिन स्थायी जगह बनाए रखे, मगर मीडिया जगत में उसका दबदबा पहले जैसा नहीं रहेगा।
यह भी पढ़े: ‘Border 2’ के गाने ‘Ghar Kab Aaoge’ का टीजर रिलीज, जानिए कब…
Suditi Raje has a background in investigative journalism, with a career spanning over 6 years. As part of the Jankiawaz team, she are committed to exposing the truth and bringing to light the stories that matter most.
