श्रीलंका के विपक्षी नेता सजिथ प्रेमदासा ने हिंद महासागर और दक्षिण एशिया में सुरक्षा, शांति और सहयोग के लिए भारत की भूमिका को निर्णायक बताया।
02 जनवरी 2026, नई दिल्ली
श्रीलंका की प्रमुख विपक्षी पार्टी समगी जना बेलावेगया (SJB) के नेता और विपक्ष के नेता सजिथ प्रेमदासा ने दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। कोलंबो से दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और पूरे दक्षिण एशिया में दीर्घकालिक शांति बनाए रखने के लिए भारत का नेतृत्व बेहद जरूरी है।
प्रेमदासा ने कहा कि भारत और श्रीलंका के राष्ट्रीय हित काफी हद तक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान, समझ और रचनात्मक सहयोग की मजबूत नींव बनी हुई है। उनके मुताबिक, मजबूत भारत–श्रीलंका संबंध पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक साबित हो सकते हैं।
भारत को बताया वैश्विक शक्ति
भारत को एक उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति बताते हुए सजिथ प्रेमदासा ने कहा कि इस सच्चाई को न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हुए कहा कि इससे मौजूदा वैश्विक शक्ति संतुलन को सही ढंग से दर्शाया जा सकेगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की नीतियों की भी सराहना की। प्रेमदासा ने कहा कि जब श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, उस समय भारत ने मानवीय और आर्थिक सहायता के जरिए श्रीलंकाई जनता का खुलकर साथ दिया। इससे देश को स्वास्थ्य, सामाजिक और विकास से जुड़ी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिली।
बांग्लादेश और SAARC पर भी रखी राय
साक्षात्कार के दौरान प्रेमदासा ने कहा कि भारत का नेतृत्व सिर्फ दक्षिण एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर बात करते हुए वहां राजनीतिक स्थिरता और आगामी चुनावों को बेहद अहम बताया। साथ ही उम्मीद जताई कि बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होंगे, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होगी।
इसके अलावा, उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस द्वारा SAARC को पुनर्जीवित करने के आह्वान का समर्थन किया। प्रेमदासा का मानना है कि SAARC जैसे बहुपक्षीय मंच आज भी शांति, संवाद और साझा समृद्धि के लिए बेहद प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि न्याय, समानता और निष्पक्षता जैसे सामाजिक लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित समावेशी विकास ही दक्षिण एशिया को स्थायी शांति और स्थिरता की ओर ले जा सकता है।
गौरतलब है कि हाल ही में ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुहम्मद यूनुस ने भी SAARC की भावना को जीवित बताते हुए संगठन को फिर से सक्रिय करने की जरूरत पर जोर दिया था।
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