ईरान ने ट्रंप के “बातचीत चल रही है” दावे को खारिज कर स्पष्ट किया कि अमेरिका-इज़राइल गठबंधन के साथ कोई समझौता नहीं होगा। तेहरान ने अमेरिकी शक्ति पर तीखा तंज कसा, मिडिल ईस्ट में टकराव चौथे हफ्ते में पहुंचा और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता की संभावना बढ़ गई।
नई दिल्ली: ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान पर कड़ा जवाब देते हुए साफ संकेत दिया है कि वह किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। ट्रंप के “बातचीत आगे बढ़ रही है” वाले दावे के कुछ ही घंटों बाद तेहरान ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका हकीकत से दूर बयानबाजी कर रहा है।
तेहरान ने अमेरिकी दावों को खारिज किया और कहा समझौता नहीं
ईरानी सशस्त्र बलों के मुख्यालय ‘खातम अल-अनबिया’ के प्रवक्ता ने तीखे शब्दों में कहा कि जिस ताकत पर अमेरिका गर्व करता था, वही अब उसकी कमजोरी बनती जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अपनी स्थिति को “समझौते” का नाम देना हकीकत से मुंह मोड़ने जैसा है।
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि दुनिया अब साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ सच और दूसरी तरफ झूठ और कोई भी जागरूक समाज अब प्रचार के असर में नहीं आएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान, अमेरिका-इज़राइल गठजोड़ के साथ किसी भी तरह की डील के पक्ष में नहीं है।
उनके मुताबिक, हालात तभी बदलेंगे जब ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की सोच पूरी तरह खत्म हो जाएगी। “हम अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करते,” यह संदेश भी उन्होंने साफ तौर पर दिया।
ट्रंप के दावों पर पलटवार
यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद आई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत सही दिशा में है और जल्द ही समाधान निकल सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंच चुका है और अमेरिका रणनीतिक बढ़त में है।
हालांकि, तेहरान ने इन सभी दावों को सिरे से नकारते हुए कहा कि न तो कोई बातचीत चल रही है और न ही वह इस समय किसी समझौते के मूड में है। ईरान का कहना है कि शांति की पहली शर्त यही है कि अमेरिका और उसके सहयोगी तुरंत सैन्य कार्रवाई बंद करें।
चौथे हफ्ते में पहुंचा संघर्ष
28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह टकराव अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है, जिससे हालात और जटिल होते नजर आ रहे हैं। जानकार मानते हैं कि इस तरह के तीखे बयान किसी भी संभावित समझौते को और मुश्किल बना सकते हैं।
इस बीच ट्रंप ने एक बार फिर बराक ओबामा के दौर की परमाणु डील का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वह समझौता खत्म न किया गया होता, तो ईरान अब तक परमाणु हथियार हासिल कर चुका होता। ईरान ने इस दावे को भी राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।
आगे की स्थिति अनिश्चित
अब नजरें अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं। ट्रंप द्वारा दिया गया पांच दिन का समय खत्म होने के करीब है। अगर हालात नहीं बदले, तो ऊर्जा ठिकानों पर हमले फिर से तेज हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में पहले ही उछाल आ चुका है और आने वाले दिनों में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
फिलहाल स्थिति यह है कि एक तरफ अमेरिका समझौते की बात कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ ईरान किसी भी तरह के दबाव को मानने से इनकार कर रहा है। ऐसे में टकराव कम होने के आसार अभी दूर नजर आ रहे
