पटना: 7 मई को बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण दिन रहा।
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के
नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कैबिनेट विस्तार का भव्य समारोह आयोजित हुआ।
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ एनडीए नेताओं की उपस्थिति रही।
इस विस्तार के साथ बिहार मंत्रिमंडल अपनी अधिकतम क्षमता (36 मंत्रियों सहित मुख्यमंत्री) के करीब पहुंच गया है।
यह विस्तार जाति, क्षेत्र और गठबंधन साझेदारों के बेहतर प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
कहां से हुआ सब शुरू?
बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए की शानदार जीत के बाद अप्रैल 2026 में
सम्राट चौधरी (भाजपा) को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी गई।
उनके साथ जद(यू) के दो वरिष्ठ और अनुभवी नेता — विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव — उपमुख्यमंत्री बनाए गए।
हालाँकि शुरुआती कैबिनेट सीमित था।
गठबंधन के अंदर सीटों का बंटवारा, जाति समीकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे पेचीदा सवालों को सुलझाने में वक्त लगा।
आज का यह विस्तार उसी प्रक्रिया की परिणति है — एक पूर्ण, संतुलित और राजनीतिक रूप से मज़बूत सरकार का गठन।
गांधी मैदान जैसे खुले और ऐतिहासिक मंच पर यह समारोह आयोजित करना भी एक संदेश था,
एनडीए बिहार में न सिर्फ सत्ता में है, बल्कि आत्मविश्वास से भरी है।
किसे कितना मिला?
बिहार में सरकार बनाना सिर्फ बहुमत का खेल नहीं है —
यह जाति, क्षेत्र और गठबंधन के बीच नाज़ुक संतुलन बनाने की कला है। इस विस्तार में वह कला साफ दिखी।
मंत्री पदों का बंटवारा इस तरह रहा:
भाजपा को मुख्यमंत्री पद सहित करीब 14 मंत्री पद मिले।
जद(यू) को दोनों उपमुख्यमंत्री पदों सहित करीब 13 मंत्री पद दिए गए।
एलजेपी (राम विलास) को 2 मंत्री पद, एचएएम (एस) को 1 और आरएलएम को भी 1 मंत्री पद दिया गया।
इस बंटवारे में अत्यंत पिछड़ी जातियों (ईबीसी), ओबीसी समुदाय, महिलाओं और अलग-अलग क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की खास कोशिश की गई।
पुराने भरोसेमंद चेहरों को बनाए रखा गया और कई नए चेहरों को मौका दिया गया।
निशांत कुमार का मंत्रिमंडल में प्रवेश
अगर इस पूरे विस्तार में एक नाम ने सबसे ज़्यादा सुर्खियाँ बटोरीं, तो वह हैं
निशांत कुमार। पूर्व मुख्यमंत्री और जद(यू) के सर्वेसर्वा नीतीश कुमार के बेटे आज पहली बार किसी सरकार में मंत्री बने।
यह सिर्फ एक नाम की शपथ नहीं थी —
यह बिहार की राजनीति में एक नई पीढ़ी के आधिकारिक प्रवेश का क्षण था।
नीतीश कुमार, जो खुद दशकों तक बिहार के सबसे प्रभावशाली नेता रहे हैं,
अब उनके बेटे की राजनीतिक यात्रा सरकार की ज़िम्मेदारी के साथ एक नए अध्याय में दाखिल हुई।
नए मंत्रिमंडल के प्रमुख चेहरे
भाजपा की तरफ से कई दिग्गज और जाने-पहचाने नाम शामिल हुए –
विजय कुमार सिन्हा (पूर्व उपमुख्यमंत्री), मंगल पांडे, श्रेयसी सिंह, संजय सिंह टाइगर, रामकृपाल यादव, नीतीश मिश्रा, संजीव चौरसिया और प्रमोद कुमार चंद्रवंशी जैसे नेताओं ने शपथ ली।
जद(यू) की तरफ से
निशांत कुमार के अलावा श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, मदन सहनी, बुलो मंडल, मोहम्मद जमा खान, शीला मंडल, लेशी सिंह, रत्नेश सदा, लक्षेंद्र पासवान, संगीता कुमारी और भगवान सिंह कुशवाहा जैसे नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली।
सहयोगी दलों की तरफ से —
एलजेपी (राम विलास) से आंजय सिंह और संजय पासवान, आरएलएम से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश, और एचएएम (एस) से संतोष कुमार सुमन ने शपथ ली।
कुल मिलाकर 32 मंत्रियों ने आज इस ऐतिहासिक समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली।
युवा और अनुभव का संतुलन
किसी भी राज्य में कैबिनेट विस्तार महज़ नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं होती
इसके पीछे गहरे राजनीतिक संदेश होते हैं।
पहली बात, युवा और अनुभव का संतुलन।
निशांत कुमार जैसे नए चेहरों के साथ विजय कुमार सिन्हा जैसे अनुभवी नेताओं को साथ रखने से सरकार यह कहना चाहती है
हम नई ऊर्जा और पुराने अनुभव, दोनों को साथ लेकर चलेंगे।
दूसरी बात, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी।
PM मोदी और अमित शाह का गांधी मैदान में उपस्थित होना बिहार को एक साफ संकेत है
केंद्र सरकार इस राज्य को प्राथमिकता देती है।
“डबल इंजन सरकार” का नारा अब एक ठोस राजनीतिक वास्तविकता की तरह दिखता है।
तीसरी बात, समावेशी प्रतिनिधित्व।
ईबीसी, ओबीसी, महिलाएं, अलग-अलग जिले — इन सभी को ध्यान में रखकर बनाई गई यह कैबिनेट बिहार की जटिल सामाजिक संरचना को सम्मान देती है।
असली परीक्षा अब शुरू होती है
शपथ समारोह तो बस शुरुआत है। अब जो असली चुनौती है, वह है — वादों को हकीकत में बदलना।
बिहार के सामने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार सृजन, कानून व्यवस्था की मजबूती
और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे बड़े मुद्दे हैं।
पूर्ण कैबिनेट बन जाने के बाद अब सरकार के पास कोई बहाना नहीं है —
हर मंत्री से, हर विभाग में, नतीजों की उम्मीद होगी।
विभागों का आवंटन शपथ के बाद जल्द ही होने की उम्मीद है।
जैसे ही यह तस्वीर साफ होगी, बिहार की जनता को पता चलेगा कि किस मंत्री के कंधों पर कौन सी ज़िम्मेदारी है।
नोट: आधिकारिक विभाग आवंटन और अंतिम सूची के लिए बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय समाचार स्रोत देखें।
Amulya Shrivastav is a journalist who loves cricket and enjoys telling stories around it. Her interest in the sport is what led her to choose journalism as a career. She holds a Master’s degree in Journalism and writes mainly on sports, while also exploring topics like politics, health, tech, and lifestyle. Her work focuses on simple, engaging storytelling that connects with readers.
