Budget 2026 के बाद सोना-चांदी के भाव लुढ़के। निवेशकों की चिंता बढ़ी, जबकि शादी के सीजन में खरीदारों को कीमतों से राहत मिली।
नई दिल्ली: आम बजट के बाद जिस स्थिरता की उम्मीद की जा रही थी, उसके उलट कीमती धातुओं के बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। सोना और चांदी, जो बीते कुछ हफ्तों से रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर कारोबार कर रहे थे, अब अचानक तेज गिरावट के दौर में आ गए हैं। इस बदलाव ने जहां निवेशकों को चौंका दिया है, वहीं गहनों की खरीद की योजना बना रहे लोगों के चेहरे पर राहत साफ नजर आ रही है।
बीते दो दिनों में चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट आई है, जबकि सोने के भाव भी अब पहले जैसे ऊंचे नहीं रहे। बाजार विशेषज्ञ इसे सिर्फ बजट की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों की बदलती रणनीति का नतीजा मान रहे हैं।
चांदी में सबसे तेज गिरावट, निवेशकों को लगा झटका
सराफा बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी के भाव में एक ही दिन में करीब 9 फीसदी तक की गिरावट देखी गई। कुछ ही दिनों पहले 4 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर को छूने वाली चांदी अब तेजी से नीचे आई है। सोमवार को इसके दाम 72,500 रुपये प्रति किलो तक लुढ़क गए, जो हालिया ऊंचाई से बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इतनी गिरावट के बावजूद, जनवरी महीने के आंकड़े देखें तो चांदी ने अब भी मजबूत बढ़त दर्ज की है। यानी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, लेकिन शॉर्ट टर्म में जोखिम जरूर बढ़ा है।
तेज उछाल के बाद सोने की कीमतों में ठहराव
सोने की कीमतों में भी कमजोरी साफ दिखी। शुद्ध सोना अपने हालिया रिकॉर्ड स्तर से हजारों रुपये सस्ता हो गया है। बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना अब 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। यह गिरावट उस तेजी के बाद आई है, जिसमें सोने ने कुछ ही हफ्तों में असाधारण बढ़त दर्ज की थी।
महीने के स्तर पर देखें तो जनवरी में सोना निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे चुका है, लेकिन बजट के बाद बने माहौल ने फिलहाल रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
गिरावट के पीछे क्या है असली वजह?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस उतार-चढ़ाव के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका और फेडरल रिजर्व से जुड़ी अटकलों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।
घरेलू स्तर पर बजट में सोने-चांदी के आयात शुल्क में किसी तरह की राहत न मिलने से भी बाजार की उम्मीदों को झटका लगा। इसके अलावा, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स पर टैक्स से जुड़ी सुविधाओं ने फिजिकल गोल्ड की मांग को कुछ हद तक कमजोर किया है।
खरीदारों के लिए मौका, निवेशकों के लिए चेतावनी
इस गिरावट ने बाजार को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ वे निवेशक हैं जो ऊंचे स्तर पर एंट्री लेकर अब सतर्क हो गए हैं, वहीं दूसरी ओर वे परिवार हैं जो शादी-विवाह या त्योहारों के लिए गहनों की खरीद का इंतजार कर रहे थे। उनके लिए यह समय फायदेमंद साबित हो सकता है। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में सोने के भाव में नरमी आई है, जिससे ज्वैलर्स के यहां पूछताछ बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
आगे क्या?
बाजार जानकारों की राय में फिलहाल जल्दबाजी से बचना जरूरी है। सोने-चांदी की कीमतें आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों और डॉलर की चाल पर निर्भर रहेंगी। अगर अंतरराष्ट्रीय दबाव कम हुआ तो रिकवरी संभव है, लेकिन अस्थिरता अभी खत्म नहीं हुई है।
बजट के बाद सोने-चांदी का बाजार एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां हर कदम सोच-समझकर उठाने की जरूरत है। चाहे आप निवेशक हों या खरीदार।
