निर्यात पर China के नए प्रतिबंधों और सैन्य बयानबाज़ी से बीजिंग–टोक्यो रिश्ते और तल्ख हुए, जबकि जापानी सामान की आपूर्ति में देरी से व्यापारिक चिंताएं बढ़ीं।
09 जनवरी 2026, नई दिल्ली
China और जापान के बीच लंबे समय से चला आ रहा कूटनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। बीजिंग ने जापान की उस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया है, जिसमें निर्यात पर लगाए गए नए नियमों को हटाने की अपील की गई थी। इसके चलते चीन भेजी जा रही जापानी खेपों में देरी होने लगी है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर असर दिखने लगा है।
टोक्यो में चीन के राजदूत ने स्पष्ट किया कि निर्यात पर लगाए गए नए नियम पूरी तरह वैध हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में जरूरी हैं। वहीं जापान का कहना है कि इस विवाद के कारण कृषि उत्पादों, मछली और प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री की आपूर्ति बाधित हो रही है। जापान की समाचार एजेंसी क्योदो के अनुसार, साके (पारंपरिक जापानी शराब) सहित कई खेपें चीन की सीमा शुल्क प्रक्रिया में फंसी हुई हैं।
सैन्य बयान से भड़का विवाद
दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ नवंबर में दिए गए उस बयान से जुड़ी मानी जा रही है, जब जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करता है तो जापान पीछे नहीं हटेगा। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी दखल को सख्ती से खारिज करता रहा है।
चीनी मीडिया का तीखा हमला
China की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेली’ ने भी जापान पर तीखा प्रहार किया है। अखबार के संपादकीय में जापान पर ‘नए सैन्यवाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा गया कि इतिहास ऐसी नीतियों के खतरनाक परिणामों की चेतावनी देता है। हालांकि, इसमें आम जापानी जनता के बजाय देश के दक्षिणपंथी धड़े को निशाने पर लिया गया।
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जापान की प्रतिक्रिया
जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरु किहारा ने माना कि कुछ निर्यात चीन में अटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि कृषि और अन्य उत्पादों का निर्यात सुचारू रूप से चलता रहे।
दक्षिण कोरिया के साथ चीन की नजदीकी
इसी बीच चीन ने दक्षिण कोरिया के साथ रिश्तों को मजबूत करने के संकेत दिए हैं। राष्ट्रपति ली जे म्युंग की बीजिंग यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच नए व्यापारिक समझौते हुए, जिसे चीनी मीडिया ने सकारात्मक रूप से पेश किया। इसे जापान के लिए एक कूटनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
तनावपूर्ण इतिहास की छाया
China और जापान के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील रहे हैं। ताइवान पर जापान का पुराना कब्जा, दोनों देशों के बीच हुए युद्ध और 20वीं सदी की घटनाएं आज भी संबंधों पर असर डालती हैं। मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया है कि राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े बयान कैसे व्यापार और कूटनीति दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
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Suditi Raje has a background in investigative journalism, with a career spanning over 6 years. As part of the Jankiawaz team, she are committed to exposing the truth and bringing to light the stories that matter most.
