भारत ने अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने कहा – पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और होर्मुज से तेल सप्लाई सामान्य हो पढ़े पूरी खबर।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर हुई सहमति को भारत ने तुरंत स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार यानी आज जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस सीजफायर से पश्चिम एशिया में लंबे समय तक शांति कायम होने की उम्मीद है। साथ ही, भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की बिना किसी रुकावट आवाजाही बहाल होने की मजबूत उम्मीद जताई है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, करीब 39 दिनों तक चले इस संघर्ष ने आम लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई पर भी असर डाला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क को बुरी तरह बाधित किया था। MEA ने स्पष्ट रूप से कहा, “हम इस सीजफायर का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। हम शुरू से ही बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर देते रहे हैं।”
ट्रंप की डेडलाइन से ठीक पहले हुआ ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपनी तय की गई 48 घंटे की डेडलाइन से महज दो घंटे पहले ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा की। ईरान ने भी इसे स्वीकार कर लिया और होर्मुज खोलने पर राजी हो गया। ट्रंप ने इसे “विश्व शांति के लिए बड़ा दिन” बताया और कहा कि ईरान अब पुनर्निर्माण की ओर बढ़ना चाहता है।
भारत के लिए राहत भरी खबर
भारत के लिए यह खबर काफी अहम है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर है। होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने से भारत की अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी और कच्चे तेल की कीमतें भी स्थिर रह सकती हैं। MEA ने साफ कहा कि संघर्ष के दौरान सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिससे आम लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।

उछाल के साथ सतर्कता का संदेश
सीजफायर के बावजूद सुरक्षा की अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय दूतावास ने तेहरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को “जल्द से जल्द” ईरान छोड़ने की सलाह दी है। हालांकि, भारत ने शांति की दिशा में सकारात्मक कदम का स्वागत किया है।
सीजफायर की खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार में जोरदार उछाल आया-सेंसेक्स 2,700 अंक से ज्यादा चढ़ गया। RBI ने आज अपनी पहली मौद्रिक नीति में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, जिसमें वैश्विक अनिश्चितता के साथ-साथ इस राहत को भी ध्यान में रखा गया हैं।
भारत की विदेश नीति का नया आयाम
यह बयान भारत की संतुलित कूटनीति को दर्शाता है, जिसमें बातचीत और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जाती है। MEA ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी वार्ता में ऑब्जर्वर बनने की कोई औपचारिक मांग नहीं कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह सकारात्मक रुख न सिर्फ क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देगा, बल्कि भारतीय निर्यातकों, प्रवासियों और ऊर्जा क्षेत्र को भी नई उम्मीद देगा। अब सबकी नजर इस दो हफ्ते के युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने वाली वार्ताओं पर है, जिसकी शुरुआत पाकिस्तान की मध्यस्थता में 10 अप्रैल से हो सकती है।
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