ईरान में नेतृत्व संकट के बीच IRGC की बढ़ती भूमिका, ओमान हमले पर सरकार का स्पष्टीकरण

ईरान में नेतृत्व संकट के बीच IRGC की बढ़ती भूमिका, ओमान हमले पर सरकार का स्पष्टीकरण

ईरान में नेतृत्व संकट के बीच IRGC की बढ़ती भूमिका पर सवाल। ओमान बंदरगाह हमले को लेकर विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बयान, क्षेत्रीय तनाव पर बढ़ी चिंता।

नई दिल्ली: ईरान की सत्ता संरचना इन दिनों गंभीर उथल-पुथल से गुजर रही है। देश में सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता के बीच सैन्य ताकतों की भूमिका पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष रूप से Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की गतिविधियां चर्चा के केंद्र में हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्र तरीके से काम कर रही हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की दोहरी सैन्य व्यवस्था-एक ओर पारंपरिक सेना (आर्टेश) और दूसरी ओर IRGC—हमेशा से देश की राजनीतिक संरचना का अहम हिस्सा रही है। IRGC की स्थापना 1979 की क्रांति के बाद इस्लामी व्यवस्था की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। यह बल सीधे सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करता था और रणनीतिक निर्णयों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी।

हालिया घटनाक्रमों के बाद, जब सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है, IRGC की जवाबी कार्रवाइयों और सैन्य अभियानों को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि केंद्रीय राजनीतिक मार्गदर्शन की कमी से सैन्य निर्णयों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच तालमेल प्रभावित हो सकता है।

ओमान बंदरगाह घटना पर विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने हाल ही में Al Jazeera को दिए एक साक्षात्कार में ओमान के एक बंदरगाह पर हुई घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संबंधित हमला ईरान की घोषित आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं था।

विदेश मंत्री के अनुसार, सरकार ने सैन्य इकाइयों को क्षेत्रीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा हालात में कुछ कार्रवाइयां पहले से तय रणनीतिक ढांचे के तहत की जा रही हैं, जिनका सीधा राजनीतिक निर्णयों से हर बार समन्वय संभव नहीं हो पाता।

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क्षेत्रीय समीकरणों पर असर

मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम ईरान की आंतरिक और बाहरी नीति पर प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सैन्य और कूटनीतिक रणनीतियों के बीच समन्वय स्पष्ट नहीं हुआ, तो इससे क्षेत्रीय संबंधों-विशेषकर खाड़ी देशों के साथ पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल ईरानी सरकार हालात को संतुलित करने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देश की सैन्य संरचना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तालमेल किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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