पौष मास की कृष्ण पक्ष एकादशी को मनाई जाने वाली Saphala Ekadashi 15 दिसंबर को है। इस व्रत से पापों का नाश होता है और जीवन में सफलता आती है।
03 दिसंबर 2025, नई दिल्ली
पौष मास की पावन Saphala Ekadashi का व्रत हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन का व्रत हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर फल प्रदान करता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी को पूरे वर्ष में आने वाली 24 एकादशियों में अत्यंत शुभ माना गया है। देवघर के बैद्यनाथ धाम के ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि Saphala Ekadashi पर किया गया व्रत साधक के जीवन की बाधाओं को दूर करता है और सौभाग्य–समृद्धि प्रदान करता है।
कब है Saphala Ekadashi? सही तिथि और समय
बैद्यनाथ पंचांग के अनुसार पौष कृष्ण एकादशी तिथि 14 दिसंबर की रात 8:46 बजे शुरू होकर
15 दिसंबर की रात 10:09 बजे समाप्त होगी।
पंचांग के नियमों के अनुसार एकादशी व्रत 15 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा।
पूजा का शुभ समय: सुबह प्रातःकाल से 11:08 बजे तक
Saphala Ekadashi का महत्व
देवघर के तीर्थ पुरोहित एवं ज्योतिषाचार्य प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि Saphala Ekadashi का व्रत साधक के पापों का नाश करता है और उसे अद्भुत पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस व्रत से—
- रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं
- जीवन में सफलता का मार्ग खुलता है
- मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
व्रत दो प्रकार से रखा जा सकता है: निर्जल या फलाहार, दोनों ही विधियां मान्य हैं।
कैसे करें पूजा?
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में—
- पीले पुष्प
- तुलसी दल
- मौसमी फल
अर्पित करना शुभ माना जाता है।
रात्रि में दीपदान विशेष रूप से फलदायी माना गया है। ऐसा करने से जीवन का अंधकार दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
एकादशी पर इन मंत्रों का करें जाप
साधक को इस दिन निम्न मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए—
- विष्णु सहस्रनाम
- भगवद गीता का पाठ
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप
आस्था, भक्ति और पुण्य का अद्भुत संगम—Saphala Ekadashi—इस बार 15 दिसंबर को मनाई जाएगी।
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