100 दिवसीय क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा राजघाट पर पूरी, प्रो. सोलंकी ने सीमित खपत का दिया संदेश

100 दिवसीय क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा राजघाट पर पूरी, प्रो. सोलंकी ने सीमित खपत का दिया संदेश

क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा 100 दिन बाद राजघाट पहुंची। प्रो. चेतन सोलंकी ने 51 शहरों में 6,000 किमी की यात्रा कर जलवायु संरक्षण और सीमित खपत का संदेश दिया

नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और टिकाऊ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रो. चेतन सिंह सोलंकी की 100 दिवसीय क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा गुरुवार को राजघाट पर संपन्न हुई। प्रो. सोलंकी ने 13 मई को इसी स्थान से यात्रा की शुरुआत की थी। समापन से पहले उन्होंने गांधी स्मृति पहुंचकर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की।

100 दिनों में 51 शहरों का सफर

क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा के दौरान प्रो. सोलंकी ने लगभग 6,000 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान अभियान 51 शहरों तक पहुंचा और 130 से अधिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इन कार्यक्रमों के जरिए जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संरक्षण, जिम्मेदार उपभोग और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली पर लोगों से चर्चा की गई। अभियान के मुताबिक, प्रो. सोलंकी ने यात्रा के दौरान 14,000 से ज्यादा लोगों से सीधे संवाद किया।

इस पूरी यात्रा में सौर ऊर्जा से चलने वाली विशेष बस का इस्तेमाल किया गया। यह बस यात्रा के दौरान उनके रहने का ठिकाना भी बनी रही।

जलवायु संकट से निपटने के लिए तेज कार्रवाई जरूरी

समापन कार्यक्रम में प्रो. सोलंकी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर लोगों की समझ और जागरूकता बढ़ रही है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि जलवायु संकट से निपटने के लिए कौन-से कदम उठाए जाएं और उन पर कितनी तेजी से अमल किया जाए।

उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक और अर्थव्यवस्था आगे बढ़ सकती है, लेकिन पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधन असीमित नहीं हैं।

‘बढ़ती खपत पर भी लगानी होगी सीमा’

प्रो. सोलंकी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़ लगाना, सौर ऊर्जा अपनाना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके साथ ही समाज को अपनी बढ़ती खपत और जरूरतों पर भी विचार करना होगा।

उन्होंने कहा, “पृथ्वी सीमित है, इसलिए हमारी जरूरतें भी सीमित होनी चाहिए।”

उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई केवल नई तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं रह सकती। लोगों के उपभोग और जीवनशैली में बदलाव भी इस प्रयास का अहम हिस्सा होना चाहिए।

10 हजार से ज्यादा लोगों ने लिया कपड़े न खरीदने का संकल्प

यात्रा के दौरान अभियान ने लोगों को पर्यावरण के अनुकूल छोटे-छोटे कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। इसी पहल के तहत 10,000 से अधिक लोगों ने एक साल तक नए कपड़े नहीं खरीदने का संकल्प लिया।

अभियान के अनुमान के अनुसार, इस पहल से 20 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी बचाने और लगभग 5 लाख किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।

‘क्लाइमेट सत्याग्रह अब शुरू होता है’

प्रो. सोलंकी ने कहा कि 100 दिनों की यात्रा पूरी होना अभियान का अंत नहीं है। बल्कि, यह क्लाइमेट सत्याग्रह के अगले चरण की शुरुआत है।

उन्होंने कहा, “यात्रा समाप्त हुई है, लेकिन क्लाइमेट सत्याग्रह अब शुरू होता है।”

अभियान के दौरान कुमार सचिन, नितिश शर्मा, वीरेंद्र चौहान और प्रकाश ईशावे ने विभिन्न शहरों और समुदायों में यात्रा को आगे बढ़ाने में सहयोग किया।

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