Home Remedies: काली सरसों या पीली सरसों का तेल—कौन सा है सेहत के लिए बेहतर?

Home Remedies: काली सरसों या पीली सरसों का तेल—कौन सा है सेहत के लिए बेहतर?

काली सरसों और पीली सरसों के तेल में क्या है फर्क? जानिए स्वाद, पाचन और दिल की सेहत के लिहाज से खाना पकाने के लिए कौन सा सरसों का तेल बेहतर माना जाता है।

नई दिल्ली: भारत के ज़्यादातर घरों में खाना सरसों के तेल में ही पकता है। इसकी तेज़ खुशबू और तीखा स्वाद दाल-सब्जी से लेकर अचार तक को खास बना देता है। लेकिन जब बात सेहत की आती है, तो अक्सर लोगों के मन में एक सवाल उठता है। काली सरसों का तेल बेहतर है या पीली सरसों का? दोनों ही तेल सरसों से बनते हैं, लेकिन इनके गुण और इस्तेमाल थोड़े अलग हैं।

काली और पीली सरसों फर्क कहां है?

काली सरसों के दाने छोटे और गहरे रंग के होते हैं। इनमें तेल की मात्रा ज्यादा होती है और इनका स्वाद काफी तीखा होता है। वहीं, पीली सरसों के दाने हल्के रंग के होते हैं और इनसे निकलने वाला तेल स्वाद और खुशबू में थोड़ा माइल्ड होता है। यही वजह है कि दोनों तेल अलग-अलग तरह की कुकिंग में इस्तेमाल किए जाते हैं।

काली सरसों के तेल की पहचान उसकी तेज़ खुशबू और स्ट्रॉन्ग टेस्ट से होती है। यह खासतौर पर तड़का लगाने, अचार और डीप फ्राई के लिए पसंद किया जाता है, क्योंकि इसका स्मोक पॉइंट ज्यादा होता है।

इस तेल में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। सीमित मात्रा में इसका सेवन पाचन को बेहतर कर सकता है और ठंडे मौसम में इसे शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है।

पीली सरसों का तेल: हल्का, सौम्य और हार्ट-फ्रेंडली

पीली सरसों का तेल उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है, जिन्हें तेज़ खुशबू पसंद नहीं। यह हल्का होता है और शरीर में जल्दी पच जाता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा अच्छी होती है, जो दिल की सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है। इसके अलावा, पीली सरसों के तेल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे त्वचा और बालों की देखभाल में भी इस्तेमाल किया जाता है।

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तो आखिर कौन सा तेल चुना जाए?

अगर आपको तीखा स्वाद पसंद है और आप तड़का या फ्राईंग के लिए तेल चाहते हैं, तो काली सरसों का तेल बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, हल्का खाना, आसान पाचन और हार्ट हेल्थ को प्राथमिकता देने वालों के लिए पीली सरसों का तेल ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। एक बात दोनों के लिए समान है। अगर तेल कोल्ड-प्रेस्ड, शुद्ध और ताजा हो, तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं।

सेहत के लिहाज से काली और पीली दोनों सरसों के तेल फायदेमंद हैं। फर्क सिर्फ आपकी ज़रूरत, स्वाद और पाचन क्षमता का है। सही मात्रा और सही तरीके से इस्तेमाल किया गया सरसों का तेल आपकी किचन का हेल्दी साथी बन सकता है।

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