INDIA की अनदेखी ऐतिहासिक जगहों की खोज करें। मालूटी मंदिर, उनाकोटी, राबदेंत्से, बसगो किला और अरवलेम गुफाओं का रोचक इतिहास जानें
नई दिल्ली: भारत में ऐसी कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये स्थान अपने भीतर इतिहास, लोककथाओं और अनोखी परंपराओं की कई कहानियां समेटे हुए हैं। जिन जगहों की हम बात करने जा रहे हैं, वे अभी भी मुख्यधारा के पर्यटन से काफी हद तक दूर हैं।
अगर आप भीड़भाड़ से अलग कुछ नया और रोमांचक अनुभव करना चाहते हैं, तो इन अनदेखी जगहों को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल कर सकते हैं। ये स्थल न केवल आपको इतिहास से रूबरू कराएंगे, बल्कि एक यादगार अनुभव भी देंगे।
मलूटी मंदिर, झारखंड
झारखंड के दुमका जिले में स्थित मालूटी मंदिर भारत की अनोखी जगहों में से एक है। कभी यहां 100 से ज्यादा मंदिर हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ अब यहां केवल 72 मंदिर ही सुरक्षित रह पाए हैं। 17वीं और 18वीं शताब्दी में बने ये मंदिर टेराकोटा कला के लिए जाने जाते हैं।

मंदिरों की दीवारों पर रामायण और महाभारत की घटनाओं को बेहद बारीकी से उकेरा गया है। घने जंगलों के बीच बसे ये मंदिर इतिहास प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इनकी उचित देखभाल न होने के कारण इनके कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त होते जा रहे हैं और इसे दुनिया की संकटग्रस्त धरोहरों में भी गिना जाता है।
उनाकोटी, त्रिपुरा
त्रिपुरा के कैलाशहर के पास स्थित उनाकोटी भारत की सबसे रहस्यमयी ऐतिहासिक जगहों में से एक है। इसे 7वीं से 9वीं शताब्दी के बीच का स्थान माना जाता है। यहां विशाल चट्टानों पर हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं।
उनाकोटी का अर्थ होता है “एक करोड़ से एक कम”। यहां भगवान शिव की 30 फुट ऊंची मूर्ति के साथ लगभग 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां मौजूद हैं।

पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव एक करोड़ देवताओं के साथ काशी जा रहे थे, तब वे उनाकोटी में रात बिताने के लिए रुके थे। उन्होंने सूर्योदय से पहले सभी को उठने के लिए कहा था, लेकिन शिव जी के अलावा कोई भी नहीं उठ पाया। इस पर शिव जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने सबको पत्थर में बदल दिया।
यूनेस्को ने 2022 में इसे अपनी अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था।
रबदेन्त्से के खंडहर, सिक्किम
सिक्किम के पेलिंग क्षेत्र में स्थित राबदेंत्से कभी सिक्किम साम्राज्य की दूसरी राजधानी हुआ करती थी। इसकी स्थापना साल 1670 में हुई थी और यह 1814 तक राज्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा। आज यहां केवल महलों और मठों के अवशेष बचे हुए हैं, जो उस दौर की झलक दिखाते हैं।

चारों ओर फैले घने जंगल और हिमालय की नजदीकी इस जगह को और भी आकर्षक बना देती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित यह जगह प्रकृति और इतिहास दोनों के प्रेमियों के लिए एक शानदार अनुभव प्रदान करती है।
बसगो किला और मठ, लद्दाख
लेह से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित बसगो किला और मठ लद्दाख की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। 15वीं शताब्दी में बना यह किला कभी नामग्याल वंश का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र था। ऊंची चट्टानों पर बने इस किले के अवशेष आज भी उस दौर की कहानी सुनाते हैं।

यहां विशाल बुद्ध मूर्ति और प्राचीन मठ पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हिमालय की ऊंची बर्फीली चोटियों के बीच स्थित यह स्थान फोटोग्राफी और इतिहास के शौकीनों के लिए बेहद खास है।
अरवलेम गुफाएं, गोवा
गोवा का नाम सुनते ही लोगों के मन में समुद्र तटों का ख्याल आता है, लेकिन अरवलेम गुफाएं राज्य के प्राचीन इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर हैं।

गोवा के बिचोलिम क्षेत्र में स्थित ये गुफाएं छठी शताब्दी की मानी जाती हैं। इनकी वास्तुकला में बौद्ध और प्राचीन हिंदू संस्कृति के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। गोवा के भीड़भाड़ वाले समुद्री तटों से अलग यह स्थान इतिहास, संस्कृति और शांति की तलाश करने वाले लोगों के लिए एक विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है।
