भारत में Apple की बढ़ीं कानूनी चुनौतियां, CCI की अंतिम चेतावनी; 3 लाख करोड़ रुपये तक के जुर्माने का खतरा

भारत में Apple की बढ़ीं कानूनी चुनौतियां, CCI की अंतिम चेतावनी; 3 लाख करोड़ रुपये तक के जुर्माने का खतरा

iOS App Store से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले में CCI ने Apple से जल्द जवाब मांगा है, देरी होने पर कंपनी पर वैश्विक टर्नओवर के आधार पर भारी जुर्माना लग सकता है।

17 जनवरी 2026, नई दिल्ली

भारत में अमेरिकी टेक दिग्गज Apple की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने कंपनी को एंटीट्रस्ट नियमों के कथित उल्लंघन मामले में अंतिम चेतावनी जारी की है। यदि Apple ने तय समयसीमा के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया, तो उस पर करीब 3 लाख करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

यह पूरा मामला Apple के iOS App Store से जुड़ा है, जहां कंपनी पर अपने प्रभुत्व का गलत इस्तेमाल करने के आरोप हैं। CCI का कहना है कि Apple ने ऐसे नियम बनाए हैं, जिनसे ऐप डेवलपर्स के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। खासतौर पर पेमेंट सिस्टम और कमीशन से जुड़े नियमों को लेकर कई भारतीय स्टार्ट-अप्स ने शिकायत दर्ज कराई थी।

इस केस की शुरुआत साल 2022 में हुई थी, जब भारतीय डेवलपर्स ने Apple पर मोनोपोली अपनाने का आरोप लगाया। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2024 में CCI ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि Apple ने बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग किया है। आयोग ने अक्टूबर 2024 में कंपनी से जवाब मांगा था, लेकिन अब तक संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

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CCI ने अब साफ कर दिया है कि यह आखिरी मौका है। यदि Apple अगले हफ्ते तक जवाब नहीं देता, तो उस पर करीब 38 बिलियन डॉलर यानी लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। आयोग का कहना है कि जुर्माना कंपनी के वैश्विक कारोबार के आधार पर तय किया जाएगा।

हालांकि, Apple ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी का तर्क है कि जुर्माना केवल भारत में हुए बिजनेस के आधार पर ही लगाया जाना चाहिए, न कि वैश्विक टर्नओवर पर। इसी को लेकर Apple ने अदालत से मामले पर रोक लगाने की मांग भी की थी।

CCI के अनुसार, Apple अपने प्लेटफॉर्म पर ऐप बेचने वाले डेवलपर्स से 15 से 30 प्रतिशत तक कमीशन वसूलता है और कई बार उन्हें बाहरी पेमेंट लिंक देने की अनुमति भी नहीं देता। इससे छोटे डेवलपर्स और स्टार्ट-अप्स की कमाई पर सीधा असर पड़ता है। आयोग का मानना है कि ऐसे नियम प्रतिस्पर्धा के खिलाफ हैं और बाजार में असंतुलन पैदा करते हैं।

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को होनी है, जहां दिल्ली हाईकोर्ट Apple की याचिका पर फैसला सुना सकता है। सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि यह मामला भारत में बड़ी टेक कंपनियों के लिए क्या मिसाल कायम करता है।

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