Assam Election Result Live: असम में BJP के नेतृत्व वाला NDA हैट्रिक के लिए तैयार

असम में BJP के नेतृत्व वाला NDA हैट्रिक के लिए तैयार (2)

असम: असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती आज सुबह से जारी है,

और शुरुआती रुझानों से संकेत मिल रहा है कि BJP के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन को

एक बार फिर असम की जनता का समर्थन मिला है।

अगर अंतिम नतीजों में भी ये रुझान सही साबित होते हैं,

तो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार तीसरी बार

असम की सत्ता संभालेंगे, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

NDA की जोरदार बढ़त

11 बजे तक के रुझानों के मुताबिक NDA लगभग 78 सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि बहुमत के लिए सिर्फ 64 सीटें चाहिए।

वहीं कांग्रेस की अगुवाई वाला विपक्षी गठबंधन महज 20 से 30 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है।

BJP खुद कई अहम सीटों पर मजबूत स्थिति में है।

जलुकबाड़ी सीट से खुद हिमंता बिस्वा सरमा मैदान में हैं और वहां से भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

आधिकारिक और पक्के नतीजे शाम तक आने की उम्मीद है।

क्यों खास था ये चुनाव?

इस बार का चुनाव कई मायनों में अलग था। 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में हुई वोटिंग में

करीब 85 से 86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया,

जो दर्शाता है कि असम की जनता इस बार बेहद सक्रिय रही।

इसके अलावा, 2023 में हुए परिसीमन (Delimitation) के बाद यह पहला चुनाव था।

इस परिसीमन ने कई सीटों की सीमाएं बदल दीं और खासतौर पर आदिवासी तथा स्थानीय समुदायों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाया।

किन मुद्दों पर लड़ा गया ये चुनाव?

  • घुसपैठ और असमिया पहचान की रक्षा

    यह असम का सबसे पुराना और संवेदनशील मुद्दा है।
    BJP ने अवैध कब्जों पर बेदखली अभियान, सीमा सुरक्षा और असम समझौते की भावना को लागू करने को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया। NRC अपडेट और CAA को लेकर बहस गर्म रही।
    विपक्ष ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है।
  • विकास, रोजगार और जनकल्याण

    सरकार ने अपनी उपलब्धियों को गिनाया, जैसे कि ‘अरुणोदय योजना’ (महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता),
    बुनियादी ढांचे का विस्तार, और असम को “पूर्व का प्रवेश द्वार” (Gateway to the East) के रूप में स्थापित करना।
    युवाओं के लिए सरकारी रोज़गार के संबंध में भी महत्वपूर्ण वादे किए गए। वहीं, विपक्ष ने बेरोज़गारी, महंगाई और असंतुलित विकास के मुद्दों पर ज़ोर दिया।
  • बाढ़, कटान और पर्यावरण की चुनौती

    असम में हर साल बाढ़ और नदी के कटाव के कारण लाखों लोगों की ज़िंदगी तबाह हो जाती है।
    सरकार ने तटबंधों और राहत कार्यों का ज़िक्र किया है,
    लेकिन आलोचकों का कहना है कि अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।
  • जमीन अधिकार और प्रशासन

    अतिक्रमण हटाने के अभियानों ने एक तीखी बहस छेड़ दी।
    सरकार ने इन्हें अतिक्रमण-विरोधी प्रयासों के तौर पर पेश किया,
    जबकि विपक्ष ने इनकी आलोचना करते हुए इन्हें ‘चुनिंदा निशाना’ बताया।
    बाल विवाह पर सख्ती, सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे और भ्रष्टाचार के आरोप भी इस एजेंडे में शामिल थे।
  • जनजातीय और क्षेत्रीय मुद्दे

    चाय बागान के मज़दूरों का कल्याण, कुछ समुदायों के लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग,
    और बोडोलैंड तथा अन्य स्वायत्त क्षेत्रों की राजनीति मुख्य मुद्दे बने रहे।
    BJP ने समान नागरिक संहिता (जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर) लागू करने का भी वादा किया।

अगर अंतिम नतीजों में भी मौजूदा रुझान बने रहते हैं,

तो यह हिमंत बिस्वा सरमा की राजनीतिक ताकत का एक साफ़ संकेत होगा।

जनता NDA की इस जीत को सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं

और असमिया पहचान की रक्षा के प्रति उसके दृष्टिकोण के समर्थन के तौर पर देखेगी।

इस नतीजे का मतलब है कि विपक्ष को अपनी सबसे बड़ी कमज़ोरी पर विचार करना होगा:

बेरोज़गारी और बाढ़ जैसे मुद्दों के बावजूद NDA के ख़िलाफ़ एक मज़बूत नैरेटिव बनाने में नाकाम रहना।

अंतिम और आधिकारिक नतीजों के लिए भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट results.eci.gov.in देखें।

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