अमित शाह ने 10 अप्रैल 2026 को कोलकाता में BJP का पश्चिम बंगाल चुनाव घोषणापत्र जारी किया। महिलाओं को हर महीने ₹3,000, युवाओं के लिए युवा साथी योजना, 45 दिन में DA बकाया, UCC लागू करने का किया वादा
पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को कोलकाता में अपना चुनावी घोषणापत्र पेश किया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसे “बिकोशितो पश्चिम बंगा संकल्प पत्र” के नाम से जारी किया।
पार्टी का दावा है कि यह दस्तावेज़ किसी दफ्तर में नहीं बना — बल्कि फरवरी 2026 से चले जनसंपर्क अभियान में आम लोगों से फोन, ईमेल और सीधी बातचीत के जरिए मिले सुझावों पर आधारित है। इसका केंद्रीय विचार है — “सोनार बांग्ला” यानी एक समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बंगाल का निर्माण। साथ ही यह TMC की 15 साल की सरकार पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की विफलता और झूठे वादों का आरोप लगाते हुए एक सीधा विकल्प पेश करता है।
आइए जानते हैं इस संकल्प पत्र में क्या-क्या है।
महिलाओं और युवाओं के लिए सीधे खाते में पैसे
संकल्प पत्र का सबसे बड़ा वादा है — महिलाओं के बैंक खाते में हर महीने सीधे ₹3,000 की राशि। यह लक्ष्मीर भंडार जैसी मौजूदा योजनाओं से एक कदम आगे है और महिला मतदाताओं को सीधा आर्थिक संबल देने की कोशिश है।
बेरोजगार युवाओं के लिए “युवा साथी” योजना का ऐलान किया गया है, जिसके तहत हर महीने ₹3,000 की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके अलावा मेरिट के आधार पर नौकरियां, औद्योगिक विकास और कौशल प्रशिक्षण के जरिए लाखों रोजगार सृजित करने का भरोसा दिलाया गया है।
सीधे शब्दों में कहें तो BJP यह संदेश देना चाहती है — हम वादे नहीं करते, हर महीने पैसे देते हैं।
सरकारी कर्मचारियों को 45 दिन में DA बकाया और सातवां वेतन आयोग
बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनभोगी लंबे समय से DA बकाये और वेतन सुधार की मांग कर रहे हैं। BJP ने वादा किया है कि सरकार बनने के महज 45 दिन के भीतर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएंगी और सारा DA बकाया चुकाया जाएगा।
यह वादा उन लोगों को सीधा संदेश है जो TMC सरकार की उदासीनता से नाराज हैं। पार्टी इसे “भरोसे पर आधारित शासन” का सबूत बता रही है।
कानून-व्यवस्था और घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस
अमित शाह ने संकल्प पत्र जारी करते हुए साफ कहा — घुसपैठ पर कोई समझौता नहीं। सीमाओं को सुरक्षित करना, सीमापार गोतस्करी रोकना और रेत माफिया पर सख्त कार्रवाई — ये सब इस दस्तावेज़ में शामिल हैं।
पार्टी का कहना है कि बंगाल में TMC के राज में आम आदमी डरकर जी रहा है। BJP एक “निडर बंगाल” बनाना चाहती है जहां महिलाएं और अल्पसंख्यक बिना भय के रह सकें। इसीलिए राज्य सरकार की सभी नौकरियों में — पुलिस बल सहित — महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का भी वादा किया गया है।
UCC और सामाजिक सुधार — छह महीने में लागू होगा समान नागरिक संहिता
यह शायद सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील वादा है। BJP ने कहा है कि सरकार बनने के छह महीने के भीतर पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी।
शाह ने इसे समानता और राष्ट्रीय एकता की दिशा में जरूरी कदम बताया। इसके अलावा आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना को पूरी तरह लागू करने और बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिए वंदे मातरम् संग्रहालय बनाने की भी बात कही गई है।
पूरे घोषणापत्र का लहजा है — “असल परिवर्तन” यानी सिर्फ नारे नहीं, ज़मीनी बदलाव।
यह जानकारी भारतीय जनता पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के घोषणापत्र से ली गई है। विस्तृत जानकारी और पूरे संकल्प पत्र को पढ़ने के लिए आप यहां विजिट कर सकते हैं:
https://www.bjp.org/home-minister-shri-amit-shah-launches-bjps-sankalp-patra-west-bengal
आर्थिक विकास — उद्योग, रोजगार और इन्फ्रास्ट्रक्चर
कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ BJP ने बंगाल की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का भी खाका पेश किया है। सिंगूर में औद्योगिक पार्क स्थापित करने का वादा — जो टाटा नैनो विवाद की याद दिलाता है — एक प्रतीकात्मक लेकिन मजबूत संदेश है।
इसके अलावा MSME, कृषि प्रसंस्करण, मत्स्य पालन और बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया गया है। दावा है कि BJP सरकार एक करोड़ नए रोजगार सृजित करेगी और बंगाल को एक विकास केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
जनता का दस्तावेज़ या चुनावी जुमले?
BJP ने इस संकल्प पत्र को “जनता की आवाज़ से बना” बताया है। फरवरी 2026 से QR कोड, फोन और ग्रासरूट बैठकों के जरिए लाखों लोगों से सुझाव लिए गए — ऐसा पार्टी का कहना है।
लेकिन असली सवाल यही है — क्या ये वादे सिर्फ वोट पाने के लिए हैं, या सच में बंगाल बदलेगा?
यह घोषणापत्र बंगाल के मतदाताओं के सामने एक स्पष्ट विकल्प रखता है — हर महीने सीधे पैसे, तेज़ शासन सुधार, सख्त सुरक्षा और एक सांस्कृतिक-राष्ट्रवादी दृष्टिकोण। TMC और BJP के बीच यह मुकाबला अब और तीखा होने वाला है।
लेकिन इन संकल्पों की असली परीक्षा होगी मतदान के दिन — और उससे भी बड़ी परीक्षा होगी सरकार बनने के बाद।
