अमेरिका स्थित डॉ. के. ए. पॉल ने मोहन भागवत से भारत में शांति, लोकतंत्र और सभी धर्मों के समान अधिकार सुनिश्चित करने का आग्रह किया
नई दिल्ली/वॉशिंगटन डी.सी.: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से पहले डॉ. के. ए. पॉल ने धार्मिक स्वतंत्रता, समान अधिकार और विभिन्न समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की वकालत की है।
डॉ. पॉल ने स्पष्ट किया कि वह भागवत की अमेरिका यात्रा का विरोध नहीं करते और उन्हें अमेरिका आने से रोकने की कोशिशों का समर्थन भी नहीं करते। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता और समान व्यवहार का अधिकार हर व्यक्ति के लिए समान होना चाहिए, चाहे उसका धर्म या विचारधारा कुछ भी हो।
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उन्होंने कहा कि भारत में ईसाइयों, मुसलमानों, हिंदुओं और सिखों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता की मांग करने वाले लोगों को दूसरे देशों में भी इन्हीं लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, भागवत को अमेरिका आने से रोकना धार्मिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण संवाद की भावना को कमजोर कर सकता है।
मणिपुर में ईसाई समुदाय के सामने आई हिंसा और पीड़ा का जिक्र करते हुए डॉ. पॉल ने कहा कि देश में प्रत्येक धर्म और समुदाय के लोगों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।
उन्होंने भागवत से न्यूयॉर्क में अपने प्रस्तावित संबोधन के दौरान भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और समानता के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने हिंसा की घटनाओं की निंदा करने और यह आश्वासन देने की अपील की कि मणिपुर जैसी स्थिति भविष्य में दोबारा नहीं होगी।
डॉ. पॉल ने कहा कि ऐसा स्पष्ट संदेश धार्मिक समुदायों के बीच विश्वास कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने लोगों से विभाजन के बजाय संवाद और आपसी समझ को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
अंतरराष्ट्रीय शांति पहलों में सक्रिय रहे डॉ. पॉल ने सात प्रमुख धर्मों के नेताओं को एक मंच पर लाने वाले कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने शांति और सद्भाव का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
