Holi 2026 के लिए घर पर बनाएं केमिकल-फ्री हर्बल गुलाल। जानें हल्दी, चुकंदर और पालक से प्राकृतिक रंग तैयार करने के आसान तरीके और सुरक्षित होली मनाने के टिप्स।
नई दिल्ली: होली का त्योहार नजदीक है। 4 मार्च को रंगों की धूम रहेगी और 3 मार्च को होलिका दहन के साथ उत्सव की शुरुआत होगी। लेकिन रंगों की इस मस्ती के बीच एक चिंता हर साल सामने आती है बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त रंग। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते और मिलावटी रंगों में मौजूद रसायन त्वचा, आंखों और बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चों और संवेदनशील त्वचा वालों के लिए यह खतरा और बढ़ जाता है।
इसी वजह से इस बार कई लोग सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ भी सलाह दे रहे हैं कि अगर संभव हो तो घर पर बने प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें। अच्छी बात यह है कि ये रंग रसोई में मौजूद सामान्य चीजों से आसानी से तैयार किए जा सकते हैं।
क्यों बढ़ रहा है नेचुरल रंगों का चलन?
केमिकल रंगों से एलर्जी, खुजली, जलन और रैशेज जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। वहीं प्राकृतिक रंग न केवल त्वचा के लिए नरम होते हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं। ये आसानी से धुल जाते हैं और पानी को भी प्रदूषित नहीं करते।
घर पर रंग बनाने का एक फायदा यह भी है कि आप सामग्री खुद चुनते है। इसलिए मिलावट की आशंका नहीं रहती। साथ ही यह परिवार के साथ की जाने वाली एक रचनात्मक गतिविधि भी बन सकती है।
ऐसे तैयार करें घर के बने होली रंग
- पीला गुलाल- हल्दी को बेसन या कॉर्नस्टार्च के साथ मिलाकर हल्का और मुलायम पीला रंग तैयार किया जा सकता है। हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण भी होते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।
- लाल या गुलाबी रंग- चुकंदर का रस निकालकर उसमें कॉर्नस्टार्च मिलाएं और सुखाकर पाउडर बना लें। सूखे गुड़हल के फूल पीसकर भी सुंदर गुलाबी शेड तैयार किया जा सकता है।
- हरा रंग- पालक या धनिया के पत्तों को पीसकर उसका अर्क निकालें। इस अर्क को स्टार्च के साथ मिलाकर सुखाएं। मेहंदी पाउडर भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
- नारंगी रंग- गाजर का रस या सूखे संतरे के छिलकों का पाउडर नारंगी रंग देने के लिए उपयोगी है। इन्हें स्टार्च के साथ मिलाकर सूखा गुलाल तैयार किया जा सकता है।
- नीला रंग- अगर प्राकृतिक नीला फूड कलर या इंडिगो पाउडर उपलब्ध हो, तो उसे कॉर्नस्टार्च के साथ मिलाकर सुखा लें।
इन रंगों को सूखे गुलाल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर गीला रंग बनाना हो तो इसमें पानी या गुलाबजल मिलाया जा सकता है।
कुछ जरूरी सावधानियां
- रंग बनाते दस्ताने पहनें।
- पहले त्वचा पर हल्का पैच टेस्ट कर लें।
- आंखों और मुंह से रंग दूर रखें।
होली का असली आनंद तभी है जब त्योहार के बाद भी मुस्कान बरकरार रहे। इस बार रंगों के साथ सेहत का भी ख्याल रखें और सुरक्षित, केमिकल-फ्री होली मनाएं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह या उपचार का विकल्प न समझें। Jankiawaz इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
