मध्य पूर्व तनाव और होर्मुज संकट के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल ₹321/लीटर पहुंचा। IMF की शर्तों के कारण सरकार राहत देने में असमर्थ, महंगाई और ईंधन संकट से आम जनता परेशान।
इस्लामाबाद/लाहौर: पाकिस्तान इन दिनों एक गंभीर ईंधन संकट से जूझ रहा है। मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव दुनिया भर के तेल बाजारों को हिला रहा है — और इसका सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान जैसे कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों को लग रहा है।
7 मार्च 2026 से पेट्रोल की कीमतें 321.17 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं, जो देश के इतिहास में सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी है। Organiser Weekly एक तरफ IMF की सख्त शर्तें हैं जो सरकार को सब्सिडी देने से रोक रही हैं, दूसरी तरफ आम आदमी की जेब खाली हो रही है। यह सिर्फ पेट्रोल की कीमत नहीं, बल्कि एक पूरे देश की जिंदगी का सवाल बन चुका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद — और पाकिस्तान की मुश्किलें शुरू
पाकिस्तान अपनी कुल जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है — ज्यादातर सऊदी अरब और UAE से, होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने मार्च 2026 की शुरुआत में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 50–70% का उछाल ला दिया। PAKISTANPETROLPRICES इससे पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल 600 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
देश के विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ तीन महीने के आयात के लिए काफी हैं और पेट्रोलियम स्टॉक केवल 25–30 दिन चलने लायक बचा है। पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें और जमाखोरी की खबरें भी सामने आई हैं।
IMF की शर्तें — सरकार के हाथ बंधे
पाकिस्तान $7 अरब के IMF विस्तारित कोष सुविधा (EFF) कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालना जरूरी है। Arab News PK इसका मतलब है — सरकार न सब्सिडी दे सकती है, न कोई राहत। IMF ने साफ कह दिया है कि पेट्रोलियम डेवलपमेंट लेवी (PDL) का लक्ष्य जून 2026 तक 1,468 अरब रुपये रखना होगा।
इन्हीं शर्तों के चलते 6–7 मार्च को एक रात में ही पेट्रोल और डीजल दोनों में 55 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब और पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इस बढ़ोतरी को अपरिहार्य बताया। Mettis Global अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि IMF कार्यक्रम के बिना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।
सरकार ने लागू किया आपातकालीन तपस्या का दौर
10 मार्च को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कई कड़े कदमों का ऐलान किया:
- सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह, 50% रोटेशन पर घर से काम
- 16 मार्च से मार्च के अंत तक स्कूल बंद, विश्वविद्यालय पूरी तरह ऑनलाइन
- मंत्रियों और सांसदों के वेतन में कटौती, विदेश यात्राएं इकोनॉमी क्लास में
- शादियों और पार्टियों में अधिकतम 200 मेहमान और सिर्फ एक डिश
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए मुश्किल फैसले लेने पड़े, हालांकि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। Organiser Weekly ये उपाय खासतौर पर रमजान के महीने में ऊर्जा बचाने और IMF के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उठाए गए हैं।
आम पाकिस्तानी की जिंदगी
असली मार उन लोगों पर पड़ी है जो रोज कमाकर रोज खाते हैं — रिक्शा चालक, डिलीवरी बॉय, मजदूर, किसान और निम्न-मध्यम वर्ग।
यातायात हुआ महंगा: कराची में जो सफर 20 रुपये में होता था, अब 30 रुपये लग रहे हैं। राइड-हेलिंग ऐप्स 15–20% महंगी हो गई हैं। लाहौर से कराची का किराया 1,000–2,000 रुपये बढ़ गया है। कई परिवारों ने ईद की ट्रेवल प्लानिंग ही रद्द कर दी।
डिलीवरी वर्कर्स पर दोहरी मार: एक सामान्य डिलीवरी राइडर अब सिर्फ पेट्रोल पर रोज 165 रुपये ज्यादा खर्च कर रहा है — यानी उसकी रोजाना कमाई का 16% या उससे ज्यादा सिर्फ ईंधन में चला जा रहा है। कई राइडर इफ्तार के लिए चैरिटी किचन का सहारा लेने को मजबूर हैं।
खाने-पीने की चीजें भी महंगी: सब्जी और फल एक ही दिन में 20–25% महंगे हो गए। आटे का थैला 50–100 रुपये बढ़ा। KCCI अध्यक्ष रेहान हनीफ ने कहा कि यह बोझ मध्यम वर्ग पर ऐसे समय में डाला गया है जब लोग पहले से रमजान और ईद की महंगाई झेल रहे हैं। Arab News PK महंगाई की दर फरवरी के करीब 7% से उछलकर 15–17% पहुंचने का अनुमान है।
शेयर बाजार भी धराशायी
पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX) का KSE-100 इंडेक्स एक ही ट्रेडिंग सत्र में 13,157 अंक यानी करीब 8.35% टूट गया। बाजार की अस्थिरता इतनी तेज थी कि पहले घंटे में ही ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। Organiser Weekly यह संकट सिर्फ आम आदमी तक सीमित नहीं, बल्कि उद्योग-कारोबार सब हिल गए हैं।
आगे क्या?
भारत की तुलना में पाकिस्तान की स्थिति बेहद अलग है — भारत ने रणनीतिक भंडार और विविध आयात मार्गों के सहारे पेट्रोल की कीमतें स्थिर रखी हैं, जबकि पाकिस्तान IMF की शर्तों के कारण पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डालने को मजबूर है। Mettis Global अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचा या तेल की कीमतें और बढ़ीं, तो पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को GDP का 1–1.5% नुकसान हो सकता है।
सरकार के पास राहत देने की कोई खास गुंजाइश नहीं है। फिलहाल, हजारों मील दूर होर्मुज में शुरू हुई यह आग सबसे ज्यादा उन पाकिस्तानी नागरिकों को जला रही है जो पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी की आग में झुलस रहे हैं।
