भारत के अलग-अलग राज्यों में मनाए जाने वाले फसल उत्सवों ने एक बार फिर देश की सांस्कृतिक विविधता और साझा कृषि परंपरा को खूबसूरती से दर्शाया।
14 जनवरी 2026, नई दिल्ली
भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता से होती है और इसका सबसे सुंदर उदाहरण फसल उत्सवों के दौरान देखने को मिलता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही समय पर अलग नामों और परंपराओं के साथ हार्वेस्ट फेस्टिवल मनाए गए, लेकिन भावना एक ही रही—आभार, खुशहाली और नई शुरुआत।
उत्तर भारत में लोहड़ी और माघी का उत्साह देखने को मिला, जहां अग्नि के चारों ओर लोग गीत-संगीत और नृत्य के साथ फसल की खुशी मनाते नजर आए। पश्चिम भारत में मकर संक्रांति और उत्तरायण पतंगों के रंगों में सराबोर रही, तो मध्य भारत में खिचड़ी पर्व श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया गया।
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पूर्वी भारत में माघ बिहू और पौष संक्रांति ने स्थानीय संस्कृति की झलक दिखाई, वहीं दक्षिण भारत में पोंगल, मकर संक्रामण और पेड्डा पंडुगा जैसे त्योहारों ने किसानों की मेहनत और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाया। इन उत्सवों में पारंपरिक व्यंजन, रंगीन सजावट और सामूहिक उत्साह देखने को मिला।
देश के नक्शे पर अलग-अलग नामों से मनाए जाने वाले ये पर्व यह साबित करते हैं कि भारत भले ही कई भाषाओं, रीति-रिवाजों और परंपराओं का देश हो, लेकिन कृषि और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना सभी को एक सूत्र में बांधती है। यही वजह है कि ‘वन इंडिया, वन फेस्टिवल’ की भावना हर साल इन फसल उत्सवों के जरिए जीवंत हो उठती है।
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Suditi Raje has a background in investigative journalism, with a career spanning over 6 years. As part of the Jankiawaz team, she are committed to exposing the truth and bringing to light the stories that matter most.
