बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर! पटना में BJP कार्यालय के बाहर चिराग पसवान को मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाले पोस्टर लगे। नारा है – ‘ना दंगा, ना फसाद, बिहार का CM सिर्फ चिराग।’ जानिए इस पूरे सियासी हलचल की असली कहानी।
पटना: बिहार की राजनीति इन दिनों एक नए मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाएं हैं, तो दूसरी तरफ उनकी कुर्सी का उत्तराधिकारी कौन होगा, इस सवाल ने पूरे सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। इसी बीच पटना में BJP के राज्य मुख्यालय के बाहर एक दिन अचानक कुछ ऐसे पोस्टर नजर आए जिन्होंने सबका ध्यान खींच लिया।
पोस्टरों पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था — ‘ना दंगा, ना फसाद हो, बिहार का CM सिर्फ चिराग हो।’ यह पोस्टर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पसवान को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे थे। बस फिर क्या था, पूरे बिहार की सियासत में हलचल मच गई।
क्या लिखा हैं पोस्टरों में?
रविवार की सुबह जब BJP दफ्तर के बाहर ये पोस्टर दिखे तो राहगीर भी रुककर देखने लगे। पोस्टरों में चिराग पसवान की बड़ी-बड़ी तस्वीरें थीं और नारे थे जो उन्हें ‘बिहार का शेर’ और ‘BJP का हनुमान’ बता रहे थे। इन पोस्टरों को LJP (रा.) के समर्थकों ने लगाया बताया जा रहा है।
ये पोस्टर महज कागज के टुकड़े नहीं थे, ये एक साफ राजनीतिक संदेश थे — NDA गठबंधन के भीतर सत्ता की साझेदारी में बदलाव की मांग। जब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरें सुर्खियों में आईं, उसी वक्त ये पोस्टर लगाए गए, जो इस पूरे घटनाक्रम को और मायनेदार बना देता है।
कैसे चिराग पासवान बने बिहार की राजनीति के केंद्र में?
चिराग पसवान वो नेता हैं जिन्होंने अपने दिवंगत पिता और दिग्गज नेता राम विलास पसवान की विरासत को बखूबी संभाला है। 2020 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने BJP के साथ रहते हुए नीतीश कुमार की पार्टी JDU के खिलाफ मोर्चा खोला था, जिसने उन्हें अलग पहचान दी। ‘BJP का हनुमान’ का खिताब उन्हें केंद्रीय नेतृत्व के प्रति उनकी बेमिसाल वफादारी के लिए मिला।
पिछले कुछ महीनों में चिराग ने रोजगार, विकास और शांति जैसे जमीनी मुद्दों को अपनी राजनीति का आधार बनाया है। नतीजा यह है कि युवाओं और दलित वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर भी #ChiragForCM जैसे हैशटैग ट्रेंड करते देखे गए।
क्या रही सियासी दलों की प्रतिक्रिया ?
पोस्टर लगते ही हर तरफ से प्रतिक्रियाएं आने लगीं। LJP (रा.) के नेताओं ने इसे जनता की आवाज बताया और कहा कि लोग चिराग को बिहार की बागडोर सौंपना चाहते हैं। वहीं BJP के कुछ नेता इस मामले को टाल गए और इसे ‘आंतरिक विषय’ बताया।
विपक्ष, खासकर RJD ने इसे NDA के भीतर की खींचतान का नाम दिया। चिराग पसवान खुद एक इंटरव्यू में कह चुके हैं कि बिहार के लिए काम करने को वे हमेशा तैयार हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद का फैसला हाई कमांड करेगी।
बिहार की राजनीति का यह दौर बेहद दिलचस्प है। BJP दफ्तर के बाहर लगे पोस्टर सिर्फ कागज पर लिखे नारे नहीं हैं, ये गठबंधन की राजनीति में बदलाव की आहट हैं। ‘ना दंगा, ना फसाद, बिहार का CM सिर्फ चिराग’ — यह नारा शांति और युवा नेतृत्व की चाहत को दर्शाता है।
हालांकि अंतिम फैसला NDA नेतृत्व के हाथ में है, लेकिन इतना तय है कि चिराग पसवान अब बिहार की सियासत के सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं। ‘BJP का हनुमान’ कहे जाने वाले इस युवा नेता का सफर आगे कहाँ जाता है, यह देखना बेहद रोचक होगा। बिहार की जनता की नजरें अब आने वाले दिनों पर टिकी हैं।
