Constitution Day 2025: अनुच्छेदों और अधिकारों की झलक दिखाती ये बेहतरीन बॉलीवुड फिल्में

Constitution Day 2025: अनुच्छेदों और अधिकारों की झलक दिखाती ये बेहतरीन बॉलीवुड फिल्में

Constitution Day पर जानिए उन बॉलीवुड फिल्मों के बारे में, जिन्होंने न्याय, समानता, अभिव्यक्ति, भेदभाव और नागरिक अधिकारों जैसे मुद्दों को कहानी के ज़रिए लोगों तक पहुँचाया है।

26 नवंबर 2025 , नई दिल्ली

हर साल 26 नवंबर को पूरे देश में Constitution Day मनाया जाता है। यह दिन हमें न सिर्फ़ भारतीय संविधान की महत्ता का एहसास दिलाता है, बल्कि हमारे अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक भी करता है। कई बॉलीवुड फिल्मों ने भी इसी दिशा में अहम योगदान दिया है। इन फिल्मों ने अनुच्छेदों और कानूनों से जुड़े मुद्दों को बड़े पर्दे पर ऐसे ढंग से पेश किया कि आम दर्शक भी उन्हें बेहतर समझ सके।

आइए नज़र डालते हैं ऐसी ही कुछ खास फिल्मों पर—

1. आर्टिकल 15 (2019)

अनुभव सिन्हा की यह फिल्म एक सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानी के ज़रिए संविधान के अनुच्छेद 15 को उजागर करती है। इसमें आयुष्मान खुराना एक ऐसे अधिकारी की भूमिका निभाते हैं, जो समाज में फैले जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाता है। यह फिल्म बताती है कि धर्म, जाति, लिंग, नस्ल और जन्मस्थान के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।

2. सेक्शन 375 (2019)

अजय बहल द्वारा निर्देशित यह कोर्टरूम ड्रामा भारतीय दंड संहिता की धारा 375 पर आधारित है। राहुल भट्ट, अक्षय खन्ना और ऋचा चड्ढा की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म यौन अपराधों और उनके कानूनी पक्ष की गहरी पड़ताल करती है। कहानी सेक्शन 375 के दुरुपयोग और वास्तविक न्याय के बीच होने वाले संघर्ष को सामने लाती है।

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3. आरक्षण (2011)

प्रकाश झा की इस सामाजिक-राजनीतिक फिल्म में अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान, मनोज बाजपेयी और दीपिका पादुकोण जैसे दिग्गज कलाकार नज़र आए। फिल्म संविधान के अनुच्छेद 16 से जुड़े आरक्षण प्रावधानों पर केंद्रित है, जिसमें सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को समान अवसर देने की जरूरत और चुनौतियों को दर्शाया गया है।

4. आर्टिकल 370 (2024)

यह फिल्म उस दौर को चित्रित करती है जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने का निर्णय लिया। यामी गौतम, प्रियामणि और अरुण गोविल अभिनीत यह फिल्म राजनीतिक और संवैधानिक बदलावों की पृष्ठभूमि को रोचक ढंग से सामने लाती है। निर्देशक आदित्य सुहास जंभाले ने इस संवेदनशील विषय को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।

5. न्यूटन (2017)

राजकुमार राव की यह फिल्म संविधान द्वारा दिए गए वोट देने के अधिकार के महत्व को बेहद सरल और प्रभावी ढंग से बताती है। एक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चुनाव करवाने की जिम्मेदारी निभाते हुए उनका किरदार लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का संदेश देता है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी की भूमिका भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ती है।

6. अलीगढ़ (2016)

हंसल मेहता द्वारा निर्देशित ‘अलीगढ़’ भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर केंद्रित है। फिल्म समलैंगिक समुदाय के अधिकारों और उनकी सामाजिक संघर्षों की मार्मिक कहानी बयां करती है। मनोज बाजपेयी ने अपने पात्र को इतनी संवेदनशीलता से निभाया कि यह फिल्म LGBTQ अधिकारों पर सबसे प्रभावी फिल्मों में गिनी जाती है।

इन फिल्मों का उद्देश्य सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारे संविधान, अधिकारों और सामाजिक न्याय के मूल्यों को समझाने का एक सार्थक प्रयास भी है।

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