‘Bhole’ vs ‘Kaithi’: रीमेक डील टूटी, कोर्ट में पहुंचा मामला

'Bhole' vs 'Kaithi': रीमेक डील टूटी, कोर्ट में पहुंचा मामला

Bhole’ vs ‘Kaithi’: मेक अधिकारों का भुगतान न होने से राइट्स वापस लौटने का दावा, अजय देवगन की फिल्म पर स्ट्रीमिंग-डिस्ट्रीब्यूशन पर रोक की मांग।

नई दिल्ली: भोला को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। तमिल फिल्म कैथी के प्रोड्यूसर ड्रीम वॉरियर पिक्चर्स ने दावा किया है कि रीमेक के लिए तय शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते फिल्म के अधिकार अब फिर से उनके पास लौट आए हैं। इस मामले में कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभी कोई अंतिम फैसला नही दिया है। जस्टिस शर्मिला देशमुख की बेंच ने पहले यह देखा कि क्या यह केस मुंबई में सुना जा सकता है या नही। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

भुगतान में देरी से बिगड़ा मामला

ड्रीम वॉरियर का कहना है कि उन्होंने रिलायंस एंटरटेनमेंट के साथ एक समझौते के तहत ‘Kaithi’ के हिंदी रीमेक के अधिकार दिए थे। इसके लिए मार्च 2023 में एक एग्रीमेंट साइन हुआ था। लेकिन तय रकम का पूरा भुगतान नही किया गया हैं। कंपनी के मुताबिक सिर्फ पहली किस्त दी गई, जबकि बाकी पैसे समय पर नहीं मिले थे।

कई बार याद दिलाने के बावजूद जब भुगतान नही हुआ, तो कंपनी ने नोटिस जारी किया। समयसीमा पूरी होने के बाद यह करार अपने आप खत्म हो गया और सभी अधिकार वापस ड्रीम वॉरियर के पास चले गए। इसके बाद जो दूसरा समझौता हुआ था, उसमें अजय देवगन की कंपनी भी शामिल थी, उसकी वैधता पर भी सवाल उठ गए हैं।

किन-किन पर कार्रवाई की मांग

याचिका में ड्रीम वॉरियर ने रिलायंस एंटरटेनमेंट, अजय देवगन की प्रोडक्शन कंपनी, Amazon Prime Video, ZEE5 और टी-सीरीज को पक्षकार बनाया है। कंपनी ने कोर्ट से मांग की है कि ‘भोला’ को किसी भी प्लेटफॉर्म पर दिखाने, बेचने या प्रसारित करने पर रोक लगाई जाए। साथ ही फिल्म से हुई कमाई का पूरा हिसाब भी मांगा गया है।

रिलीज के बाद उठा विवाद

दिलचस्प बात यह है कि ‘Bhole’ मार्च 2023 में रिलीज हो चुकी है और अब करीब तीन साल बाद यह विवाद सामने आया है। इससे पहले ड्रीम वॉरियर ने इस मामले को एनसीएलटी में भी उठाया था, लेकिन वहां से राहत नही मिली। अब उन्होंने सिविल कोर्ट का रुख किया है।

रिलायंस और अजय देवगन की तरफ से यह दलील दी गई है कि इस मामले की सुनवाई मुंबई में नहीं, बल्कि चेन्नई में होनी चाहिए, क्योंकि मूल समझौते में ऐसा प्रावधान है। इसी मुद्दे पर कोर्ट ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा है।

इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकेत

यह विवाद सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नही है, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संदेश भी है। खासकर साउथ फिल्मों के हिंदी रीमेक बनाते समय अब कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों, भुगतान और अधिकारों को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ेगी।

अगर कोर्ट ड्रीम वॉरियर के पक्ष में फैसला देता है, तो ‘भोला’ की स्ट्रीमिंग और अन्य कमर्शियल इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है। वहीं, अगर मामला चेन्नई ट्रांसफर होता है, तो कानूनी प्रक्रिया और लंबी खिंच सकती है। फिलहाल सभी की नजर कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है, जो आने वाले समय में ऐसे रीमेक प्रोजेक्ट्स की दिशा तय कर सकता है।

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